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किसी भी स्कूल या छात्र को APAAR ID बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : शिक्षा मंत्रालय

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, किसी भी स्कूल में छात्र को अपार आइडी बनवाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। लेकिन बिहार में शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है।
  • RTI के तहत पूछे गए प्रश्नों का शिक्षा मंत्रालय ने 2 दिसंबर 2024 को भेजा जवाब
  • बेगूसराय में 60 प्रतिशत से कम अपार आइडी जेनरेट करने पर 3 दिन का वेतन काटने का आदेश

बेगूसराय | इन दिनों सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में APAAR ID बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा है। शिक्षकों के लिए अपार बनाने का काम सिर दर्द से कम नहीं है। खासकर बेगूसराय के शिक्षक कुछ ज्यादा ही परेशान हैं। शिक्षकों को नामांकित सभी बच्चों की APAAR ID हर हाल में जल्द से जल्द बनाने को कहा जा रहा है। 60 प्रतिशत से कम अपार आइडी बनाने वाले विद्यालय के प्रधानाध्यापक, वर्ग शिक्षक और कम्प्यूटर शिक्षकों का तीन दिन का वेतन काटने का आदेश दिया जा रहा है। जबकि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने आरटीआइ के जवाब में कहा है कि किसी भी छात्र को APAAR ID बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब जबरन अपार आइडी नहीं बना सकते तो फिर शिक्षक सभी नामांकित बच्चों की अपार आइडी कैसे बनाएंगे? लक्ष्य पूरा नहीं होने पर उनका वेतन क्यों कटेगा? उन पर इतना मानसिक दबाव क्यों बनाया जा रहा है? हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने अपार आइडी के माध्यम से सभी छात्रों के शिक्षा रिकॉर्ड को 100 फीसदी इंटिग्रेट करने के लिए 2026-27 की समय सीमा प्रस्तावित की है।

बिहार के विद्यालय प्रशासन पर अन्यायपूर्ण दबाव : रंजन कुमार
प्राथमिक शिक्षक साझा मंच के समन्वय समिति सदस्य रंजन कुमार ने बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों पर अपार आइडी (APAAR ID) निर्माण के लिए डाले जा रहे अनुचित दबाव को गैरजरूरी और गैरकानूनी बताया। कहा कि बिना किसी तकनीकी संसाधन एवं सहायता के शिक्षकों पर अपार आइडी बनाने की जिम्मेदारी थोपना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक है। उन्होंने कहा कि बिहार के अधिकांश प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में इंटरनेट, कंप्यूटर और डाटा एंट्री ऑपरेटर नहीं हैं। फिर भी शिक्षकों को विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी देकर इस कार्य के लिए बाध्य किया जा रहा है।

आधार की तरह अपार के लिए भी नियामक एजेंसी बने
रंजन कुमार ने कहा कि सरकार को आधार निर्माण की प्रक्रिया से सीख लेनी चाहिए। आधार के लिए सरकार ने “आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016” और “आधार अधिनियम (संशोधन), 2019” बनाए। सुप्रीम कोर्ट के 2018 के ऐतिहासिक फैसले के तहत UIDAI को जिम्मेदारी दी गई और विद्यालयों को केवल जन्म व आवासीय प्रमाणन की भूमिका तक सीमित रखा गया। इसी तरह अपार आइडी निर्माण की जिम्मेदारी विद्यालयों से हटाकर एक स्वतंत्र नियामक एजेंसी को दी जाए ताकि शिक्षक शैक्षणिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। विद्यालयों को केवल छात्र रिकॉर्ड सत्यापन तक सीमित किया जाए न कि तकनीकी कार्यों का बोझ डाला जाए।

APAAR यानी ऑटोमेटिक परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री
नई शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के मद्देनजर केंद्र सरकार की ‘वन नेशन वन स्टूडेंट आइडी’ योजना अनुसार APAAR ID (ऑटोमेटिक परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) बनाई जा रही है। इसमें प्रत्येक छात्रों को 12 अंकों का एक यूनिक आइडी नंबर मिलेगा। अपार आइडी को सरकार ने शैक्षणिक पासपोर्ट का नाम दिया है।

अपार आइडी में क्या-क्या दर्ज होगा
कार्ड में नाम, लिंग, जन्मतिथि, पता, अभिभावक का नाम, ब्लड ग्रुप, ऊंचाई, वजन, शैक्षणिक योग्यता (प्राइमरी से उच्चतर मार्कशीट, सर्टिफिकेट, डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र), कैरेक्टर सर्टिफिकेट, SLC सहित अन्य दस्तावेज मौजूद रहेंगे। खेल प्रतियोगिता में हिस्सा, स्कॉलरशिप, अवॉर्ड, स्किल ट्रेनिंग, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज, ओलिंपियाड में सहभागिता की जानकारी भी अपार आइडी में रहेगी।

अपार आइडी के फायदे : इससे फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र और डुप्लीकेट मार्कशीट पर नकेल कसेगी। फर्जीवाड़ा बंद हो जाएगा। विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं और नामांकन के दौरान वेरिफिकेशन करना आसान होगा। छात्रवृत्ति पाने, एक संस्थान से दूसरे संस्थान में क्रेडिट ट्रांसफर, इंटर्नशिप, नौकरी और अकादमिक रिकॉर्ड के सत्यापन में अपार आइडी काफी काम आएगा।

आरटीआइ के तहत क्या-क्या सवाल पूछे गए थे

RTI Question

पढ़िए, आरटीआइ ने क्या जवाब भेजा

RTI Answer

पढ़िए, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का आदेश

AAPAR LATTER BEGUSARAI 25-01-2025-1

Picture of हिमांशु शेखर

हिमांशु शेखर

17 वर्षों से पत्रकारिता का सफर जारी। प्रिंट मीडिया में दैनिक भास्कर (लुधियाना), अमर उजाला (जम्मू-कश्मीर), राजस्थान पत्रिका (जयपुर), दैनिक जागरण (पानीपत-हिसार) और दैनिक भास्कर (पटना) में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्य करने के बाद पिछले एक साल से newsvistabih.com के साथ डिजिटल पत्रकारिता।
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