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जल संरचनाओं को चिन्हित कर अतिक्रमणमुक्त करें

जल–जीवन–हरियाली दिवस के मौके पर राजस्व सर्वेक्षण संस्थान पटना में परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें जल संचयन संरचनाओं को अतिक्रमणमुक्त करने पर जोर दिया गया।

पटना | जल–जीवन–हरियाली दिवस के अवसर पर राजस्व सर्वेक्षण (प्रशिक्षण) संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना में परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं यथा तालाब, पोखर, आहर एवं पइनों को चिन्हित कर अतिक्रमणमुक्त करने पर जोर दिया गया। परिचर्चा का उद्घाटन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने जल–जीवन–हरियाली अभियान की महत्ता और पिछले छह वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अभियान से जुड़े सभी 15 विभागों के समन्वित प्रयासों से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान के सभी 11 अवयवों पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।

आने वाली पीढ़ी को जल संकट से बचाना होगा : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव अरुण कुमार सिंह ने परिचर्चा में पौधरोपण, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और जल संरचनाओं को अतिक्रमणमुक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल ने कहा कि अब तक इस दिशा में संतोषजनक कार्य हुआ है, लेकिन इसे और प्रभावी बनाने के लिए सभी संबद्ध विभागों को बेहतर प्रयास करने होंगे। तभी आने वाली पीढ़ी जल संकट की समस्या से बच पाएगी।

2 अक्टूबर 2019 को शुरू हुआ था जल–जीवन–हरियाली अभियान : जल–जीवन–हरियाली अभियान के मिशन उप निदेशक राम कुमार पोद्दार ने 2 अक्टूबर 2019 से शुरू अभियान की उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि छह वर्षों की अवधि में यह अभियान राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। बिहार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मिसाल पेश की है। कार्यक्रम में भू अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय की निदेशक जे प्रियदर्शिनी, विशेष कार्य पदाधिकारी चंद्रिका अत्री भी मौजूद थीं। कार्यक्रम का संचालन सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी पल्लवी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव आजीव वत्सराज ने किया।
परिचर्चा में भाग लेते विभागीय पदाधिकारी व अन्य।
इन 15 विभागों के अधिकारियों ने कार्यों से कराया अवगत : इस मौके पर ग्रामीण विकास विभाग, भवन निर्माण विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, पंचायती राज विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, ऊर्जा विभाग, कृषि विभाग, शिक्षा विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, भवन निर्माण विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने इस दिशा में हो रहे कार्यों से अवगत कराया।

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हिमांशु शेखर

पत्रकारिता ही की है अब तक।
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