पटना | चाहे नामांतरण हो, दाखिल-खारिज हो या सरकारी भूमि का मामला, फर्जी कागजात सामने आते ही संबंधित व्यक्ति पर अनिवार्य प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। अंचलाधिकारी (सीओ) स्वयं प्राथमिकी दर्ज कराएंगे और किसी भी स्तर पर लापरवाही या संरक्षण को गंभीर कदाचार माना जाएगा। ये बातें उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को कही। उन्होंने कहा कि भूमि से संबंधित मामलों में जाली और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर खेल किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जमीन माफिया, दलाल और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ डबल इंजन की सरकार की नीति स्पष्ट है:- कानून का कठोरतम प्रहार और शून्य सहनशीलता।
सभी सीओ को लिखित रूप से स्पष्ट निर्देश
विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने सभी अंचलाधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि किसी भी भू-राजस्व कार्रवाई में जाली, कूटरचित अथवा मिथ्या दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की बात प्रथम दृष्टया सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के सुसंगत प्रावधानों के तहत स्थानीय थाना में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाए। यह निर्देश भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान प्रमंडलीय मुख्यालयों में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रमों में सामने आए तथ्यों के बाद जारी किया गया है।

इन अधिकारियों को भी जिम्मेदारी
निर्देश के अनुसार, सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में संबंधित अंचलाधिकारी स्वयं स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। निजी या रैयती भूमि के विवाद में जांचोपरांत अंचलाधिकारी या राजस्व पदाधिकारी की अनुशंसा पर परिवादी के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। सचिव ने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि पूर्व की समीक्षात्मक बैठकों में ऐसे मामले सामने आने के बावजूद कई स्थानों पर अंचल स्तर से प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया है।











