- संसद व विधान मंडल में प्रश्न काल की अकाल मृत्यु हो जाती है : शत्रुघ्न प्रसाद सिंह
- मिड्ल स्कूल बीहट के प्रांगण में कॉमरेड चन्द्रशेखर जयंती समापन समारोह आयोजित

बेगूसराय। कॉमरेड चन्द्रशेखर जयंती समापन समारोह के मौके पर मिड्ल स्कूल बीहट के प्रांगण में शनिवार को भारतीय जनतंत्र की यात्रा विषयक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता तेघड़ा के पूर्व विधायक कॉमरेड रामरतन सिंह ने की। विषय प्रवेश कराते हुए पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि जनतंत्र का जनाजा जिस तरह से राजसत्ता निकाल रहा है उसका प्रतिरोध नहीं हो रहा है। संविधान की प्रस्तावना का घोर उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संसद व विधान मंडल में प्रश्न काल की अकाल मृत्यु हो जाती है। और संसद भवन व विधान मंडल जन सवालों का मुर्दा घर बन कर रह गया है। ऐसे समय में जनतंत्र को बचाने के लिए हमें क्या करना चाहिए, इस संबंध में विस्तार से लोगों को समझाएं।
जन संघर्ष रूकेंगे तो जनतंत्र की यात्रा रूक जाएगी
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद ने कहा कि भारत के जनतंत्र की यात्रा दलदल में फंस गई है। यह फासिज्म का दलदल है। जनतंत्र धीरे-धीरे फासिज्म की ओर जा रहा है। समाज खुद को खा रही है। ऐसे हालत में समाज को बचाना असंभव सा लग रहा है। समाज में जनतांत्रिक मूल्य को वापस लाने की जरूरत है। जनतंत्र को बचाने के लिए खुद को जगाना होगा। राजनीतिक दलों को काम करने के तरीके के बारे में सोचना होगा। अब और वक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि जनतंत्र खतरे में है। फासिज्म के पनपने के कारणों के बारे में गहन चिंतन करते हुए उन्होंने कहा कि संविद सरकार में कम्युनिस्ट और आरएसएस एक साथ हुआ जो जनतंत्र के साथ धोखा है। 1974 में जयप्रकाश नारायण ने जनतंत्र को बड़ा धोखा दिया। 1967 से 1977 के बीच भारत के नसों में सांप्रदायिक विचारधारा प्रवेश कर गई। वर्ष 2014 में बहुसंख्यकवादी बहुमत बना। आज संवैधानिक अदालत नहीं एग्जिक्यूटिव अदालत बन गई है। न्यायपालिका का काम सत्ता पर निगाह रखना है। चुनाव आयोग निर्लज्जता के साथ सरकार सरकार का एजेंट की तरह काम कर रहा है। आज जो लोग शासन कर रहे हैं वे लोग उस समय हिन्दू कोड बिल का विरोध कर रहे थे। शिक्षा का बुनियादी अधिकार के लिए सौ वर्ष तक आंदेलन हुआ और उसके लिए कानून बना जो 15 साल बाद निष्प्रभावी हो गया। देश में अंग्रेजों से आजादी को लेकर संघर्ष हुआ। अंग्रेजों से आजादी मिली। इसके साथ साथ बहुत सारी आजादियां आजादी के बाद मिली। सरकार कह रही है कि सूचना का अधिकार कानून जो आजादी के 50 वर्षों के बाद मिली वह कानून देश के विकास में बाधक बन रही रहा है। किसी भी सरकार की नीयत पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। उस पर लगातार चौकसी करनी पड़ेगी। संसद में जनप्रतिनिधि जनता के खिलाफ कानून बनाते हैं। इसलिए आमलोगों की निगरानी जरूरी है। जनतंत्र की यात्रा सीधी दिशा में नहीं हो सकती है। जहां जन संघर्ष रूकेंगे, जनतंत्र की यात्रा रूक जाएगी। धर्म निरपेक्षता भारतीय जनतंत्र की बुनियाद है। जिलामंत्री अवधेश राय ने कहा कि हम गांव-गांव तक अपूर्वानंद के विचारों से जनता को अवगत कराएंगे ताकि जनतंत्र को बचाया जा सके।

मौके पर ये लोग थे मौजूद
कार्यक्रम की शुरूआत में इप्टा के कलाकारों ने सीताराम सिंह के नेतृत्व में जनगीतों की प्रस्तुति की। मौके पर अमरनाथ सिंह, राजकिशोर सिंह, उषा सहनी, बखरी के पूर्व विधायक सूर्यकांत पासवान, प्रह्लाद सिंह, जय प्रकाश सिंह, प्रताप नारायण सिंह, अमीन हमजा, शंभु देवा समेत सैकड़ों बुद्धिजीवी मौजूद थे।









