- दो माह पूर्व ही समाहर्ता को देनी होगी मदवार व्यय विवरणी
- स्वीकृत राशि से अधिक खर्च पर अतिरिक्त आवंटन नहीं
पटना | राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित होने वाले राजकीय घोषित, बिहार राज्य मेला प्राधिकार के प्रबंधन में शामिल तथा अन्य महत्वपूर्ण मेलों के आयोजन को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मेला आयोजन के लिए राशि की मांग एवं व्यय पूर्व निर्धारित नियमों के अनुरूप ही किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में विभागीय स्वीकृति के बिना अतिरिक्त व्यय कर देनदारियों का सृजन स्वीकार्य नहीं होगा।
स्वीकृत राशि से अधिक खर्च पर अतिरिक्त आवंटन नहीं
विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा है कि मेला आयोजन की अवधि प्रारंभ होने से कम-से-कम दो माह पूर्व संबंधित जिला समाहर्ता को प्रस्ताव भेजना होगा। इसमें संभावित मदवार व्यय विवरणी के साथ राशि आवंटन के लिए प्रस्ताव होगा। इसके साथ ही विभाग द्वारा स्वीकृत राशि के अनुसार ही मेला आयोजन में व्यय किया जाएगा। आयोजन में अधिक खर्च होने पर उसका वहन जिला ही करेगा।
ऐसा निर्णय क्यों लिया गया
पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि जिलों द्वारा राशि की अधियाचना अत्यंत विलंब से की जाती है तथा कई बार विभाग की पूर्व स्वीकृति के बिना ही खर्च कर दिया जाता है। परिणामस्वरूप संवेदकों द्वारा न्यायालय में वाद दायर किए जाने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और विभाग के समक्ष अनावश्यक वित्तीय दायित्व खड़े हो जाते हैं।
प्रेस विज्ञप्ति
10.02.2026मेला आयोजन में मनमानी पर सख्ती, विभागीय स्वीकृति के बिना खर्च पर रोक
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— Revenue and Land Reforms Department (@BiharRevenue) February 10, 2026
जो राशि स्वीकृत होगी, उसी में मेले का आयोजन
विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि विभाग स्तर से कम राशि स्वीकृत की जाती है तो उसी राशि की सीमा के भीतर मेला आयोजन कराया जाए। स्वीकृत राशि से अधिक व्यय की स्थिति में अतिरिक्त राशि का आवंटन विभाग द्वारा नहीं किया जाएगा और उसके लिए संबंधित जिला स्वयं जिम्मेदार होगा। इस संबंध में विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों एवं अपर समहर्ताओं को भी पत्र भेजा है।










