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एक तरह से अघोषित आपातकाल है : विनीताभ

बेगूसराय | जनवादी लेखक संघ के 45वें स्थापना-दिवस के उपलक्ष्य में संगठन की जिला इकाई द्वारा सेमिनार और कवि सम्मेलन-मुशायरे का आयोजन स्थानीय बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला कार्यालय में किया गया। इसकी अध्यक्षता बेगूसराय जलेसं के संस्थापक अध्यक्ष जनकवि दीनानाथ सुमित्र ने की। कार्यक्रम का संचालन डॉ चन्द्रशेखर चौरसिया ने किया। ‘जनवादी लेखक संघ की विकास-यात्रा’ विषय केन्द्रित सेमिनार का उद्घाटन राज्य सचिव कुमार विनीताभ ने किया।

विनीताभ ने उद्घाटन वक्तव्य में कहा कि जनवादी लेखक संघ हिन्दी और उर्दू लेखकों का संगठन है। यह संगठन घोषित आपातकाल के विरोध में सृजनशील साहित्यकारों के सामूहिक प्रयास का सुफल है। आज देश में पूंजीपति इजारेदार और भूस्वामी गठजोड़ का शासकवर्ग सांप्रदायिक फासीवादी रवैया अपनाकर भारतीय संविधान और सामाजिक सद्भाव को विखंडित करने में लगा है। एक तरह से अघोषित आपातकाल है। इस दौर में जनवादपसंद लेखकों की व्यापक एकता कायम करना समय की जरूरत है।
लेखकों और संस्कृतिकर्मियों को मिलकर काम करने की अपील
जलेसं के पूर्व जिला सचिव साहित्यकार कला कौशल ने अपने संस्मरणात्मक वक्तव्य में संगठन के संस्थापक महासचिव डॉ० चन्द्र बली सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष भैरव प्रसाद गुप्त, प्रो० मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, डॉ० दूधनाथ सिंह, जलेसं बिहार के संस्थापक सचिव डॉ० चन्द्र भूषण तिवारी से सम्बद्ध लिखित आलेखों का पाठ किया। स्थानीय जी०डी० कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ० अभिषेक कुंदन ने कहा कि जनवादी लेखक संघ की स्थापना 14 फरवरी 1982 को दिल्ली में हुई और उसके बाद से संगठन जम्हूरियत पसंद लेखकों- कवियों के साथ मिलकर जनवादी विकल्प के लिए रचनात्मक और संगठनात्मक प्रक्रिया में निरंतर नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जनता के अधिकारों की सुरक्षा हेतु प्रतिरोध की संस्कृति को बनाये रखने के लिए लेखकों और संस्कृतिकर्मियों को मिलकर काम करने की अपील की।
कवि सम्मेलन और मुशायरे में ये हुए शामिल
आयोजन के दूसरे सत्र में हुए कवि सम्मेलन और मुशायरे में प्रभा कुमारी, रंजू ज्योति, डॉ० शगुफ्ता ताजवर, डॉ० कृष्ण सोनी, मो० सुबेर आलम, मुकेश कुमार, एस० एन० आजाद, प्रवीण प्रियदर्शी, संजीव फिरोज, देवेंद्र कुॅंवर, फुलेना रजक, सुन्दरम्, दीपक कुमार, अजीत झा ‘संजीत’, संतोष अनुराग समेत कई कवियों और शायरों ने अपनी-अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ किया। बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला सचिव मोहन मुरारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर सूर्य नारायण रजक, रमेश प्रसाद सिंह, मो० मजहर, मथुरा ठाकुर, रंजीत कुमार, शंकर मोची, रामदास ठाकुर सहित अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद थे। प्रो० जिक्रुल्लाह खान ने आगत अतिथियों का अभिनंदन किया।

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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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