- कला जगत सोशल एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन की ओर से रंग संवाद का आयोजन
बेगूसराय | रंग संस्था कला जगत सोशल एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन की ओर से रविवार को रंग अड्डा, बेगूसराय प्राइवेट आइटीआइ, लवरचक के सभागार में “सोशल मीडिया के दौर में थियेटर का भविष्य” विषय पर रंग संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत आगत अतिथियों को अंगवस्त्र प्रदान कर किया गया। इसके बाद राजकिशोर सिंह, संजीव सिंह, आशीर्वाद रंगमंडल के अध्यक्ष ललन प्रसाद सिंह, डॉ. बबन कुमार पवन, सीताराम जी, वरिष्ठ रंगकर्मी श्री अवधेश ने दीप प्रज्वलित किया। वक्ता के रूप में मौजूद जिला कला संस्कृति पदाधिकारी श्याम सहनी, डॉ. अमित रौशन, कुमार अभिजीत मुन्ना, डॉ. कुंदन कुमार का भी स्वागत सचिव नीरज कुमार ने किया।
मानवीय संवेदनाओं से प्रत्यक्ष जुड़ा होता है थिएटर: मुन्ना
विषय प्रवेश कराते हुए कुमार अभिजीत मुन्ना ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में थिएटर का महत्व मानवीय संवेदनाओं से प्रत्यक्ष जुड़ाव और गहन अनुभव के कारण और भी बढ़ गया है। थिएटर 3D लाइव और तात्कालिक अनुभव प्रदान करता है जो स्क्रीन पर लगभग असंभव है। थिएटर न केवल कला को जीवंत रखता है बल्कि दर्शकों को आलोचनात्मक सोचने और भावनाओं से जुड़ने का अनूठा मंच देता है। आज पूरी दुनिया में 450 मिलियन सोशल मीडिया यूजर हैं। इसका असर हर क्षेत्र की तरह कुछ न कुछ थिएटर पर भी पड़ा है, किन्तु थिएटर विचार का माध्यम है और सोशल मीडिया प्रचार का। सोशल मीडिया जहां तात्कालिक मनोरंजन देता है वहीं थिएटर आत्म चिंतन और वास्तविक अनुभव प्रदान करता है।

थिएटर में लाइव कहानी सुनाने की शक्ति : अमित रौशन
डॉ. अमित रौशन ने कहा कि थिएटर में लाइव कहानी सुनाने की शक्ति है। रंगमंच गहन सहभागिता को प्रोत्साहित करता है। अपूरणीय मानवीय संबंध और डिजिटल अतिभार का प्रतिपादन संतुलन करता है। थिएटर सामाजिक परिवर्तन के रूप में स्थापित है। यह एक प्रदर्शन की कला है। एक ऐसा कौशल जो समय से भी पड़े है। सोशल मीडिया के साथ हमें सामंजस्य बैठा करके आगे चलना होगा और दर्शकों तक पहुंचना होगा। डॉक्टर कुंदन कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया हमें एक तरीके से आगे ही बढ़ा रही है। हम अपने कार्यों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में सोशल मीडिया के माध्यम से भी लगातार प्रयासरत हैं।
डिजिटल युग के अनुरूप रंगमंच का भी अनुकूलन होना चाहिए: श्याम सहनी
जिला कला संस्कृति पदाधिकारी श्याम साहनी ने कहा कि कभी-कभी विपरीत परिस्थिति में सोशल मीडिया थिएटर का भी काम कर देती है। जैसे लॉकडाउन के समय हम अपनी कला को सोशल मीडिया के माध्यम से ही लोगों तक पहुंचाने में सफल रहे। वहीं नाटक एक साझा प्रयास है जो हमें मानवता की याद दिलाता है। इसलिए डिजिटल युग के अनुरूप रंगमंच का भी अनुकूलन होना चाहिए।

थिएटर पक्ष-विपक्ष दोनों की बात करता है
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह ने कहा नाटक स्थानीय संस्कृति अभिव्यक्ति और जीवंत मानवीय जुड़ाव का सबसे बड़ा मंच है। सोशल मीडिया कभी-कभी हमें अपनी संवेदनाओं से दूर करता है और गलत चीज भी परोसता है, किंतु थिएटर पक्ष-विपक्ष की बात तो करता है, लेकिन कभी भी वायरल नहीं होता है। संवेदक संजीव सिंह जी ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में थिएटर का उतना ही महत्व है जितना आज से 30 साल पहले था। थिएटर हमें अपनों से जोड़ता है। हमें अपनी संस्कृति, कला और मिट्टी से जोड़ता है। थिएटर से हम सीधे जुड़ते हैं, हमारी संवेदनाएं जुड़ती हैं। हम थिएटर में एक दर्शक रहते हुए भी आलोचनात्मक सोच को साझा कर सकते हैं।
ये लोग भी रहे मौजूद
इस अवसर पर डॉ. रंजन चौधरी, डॉ. बलवन कुमार, वरिष्ठ चित्रकार सीताराम, द प्लेयर्स एक्ट के सचिव चंदन कुमार सोनू, रिवाइवल की सचिव रजनी कुमारी, सुरभि के सचिव अजय कुमार, आकाश गंगा रंग चौपाल के गणेश गौरव, आहुति से मोहित मोहन, रंग सृजन से सचिन कुमार, SVK से रोशन कुमार आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन कला जगत संस्था के सचिव नीरज कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन दीपक कुमार ने किया।










