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सिमरिया धाम में बनेगा कंट्रोल्ड वाटर चैनल

सिमरिया धाम में कंट्रोल्ड वाटर चैनल बनाया जाएगा। एमएलसी सर्वेश कुमार ने कहा कि ऐसा होने से श्रद्धालु पूरे साल फिल्टर्ड गंगधारा में स्नान कर सकेंगे।
  • एमएलसी सर्वेश कुमार ने इंजीनियरों के साथ गंगा घाट पर संभावनाओं को तलाशा
  • अभियंताओं के दल ने सरकार को भेजी रिपोर्ट, स्वीकृति मिली तो तैयार होगा प्राक्कलन
  • पूरे साल फिल्टर्ड गंगधारा में स्नान करेंगे श्रद्धालु, योजना में बहुत कुछ शामिल

बेगूसराय | सिमरिया धाम के चहुंमुखी विकास को लेकर सरकार की सजगता अब सामने आती दिख रही है। सिमरिया धाम में सरकार ने घाट, शौचालय, कपड़ा चेंज रूम आदि का निर्माण कराया है, लेकिन गर्मी के दिनों में सीढ़ी (पौड़ी) धारा से लगभग 500 मीटर दूर चली जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी को लेकर एमएलसी सर्वेश कुमार ने विधान परिषद के बीते सत्र में न सिर्फ सवाल उठाया था बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान भी ज्ञापन देकर ध्यान आकृष्ट कराया था। 16 मार्च को पटना में जहां राज्यसभा चुनाव के मतदान को लेकर गहमागहमी चल रही थी वहीं एमएलसी सर्वेश कुमार जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के समक्ष सिमरिया के विकास का मुद्दा उठा रहे थे। मौके पर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष व सांसद संजय झा भी मौजूद थे। गौरतलब हो कि सिमरिया धाम में घाट निर्माण से लेकर अबतक के विकास में श्री झा बड़ा योगदान रहा है।

इंजीनियरों ने कैनाल की जगह चैनल निर्माण को उपयुक्त माना
एमएलसी के अनुरोध पर जल संसाधन मंत्री श्री चौधरी ने प्रधान सचिव से सिमरिया में हरकी पौड़ी की तर्ज पर पौड़ी के निर्माण की संभावना तलाश कर रिपोर्ट देने को कहा। मंत्री ने इस कार्य में एमएलसी सर्वेश कुमार से भी सहयोग लेने का निर्देश दिया। 17 मार्च को जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता रविन्द्र कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता मनीष सहित कई अभियंताओं ने सिमरिया धाम पहुंच कर पूरे घाट का निरीक्षण किया। उनके साथ एमएलसी सर्वेश कुमार भी मौजूद रहे। स्थल निरीक्षण के बाद अधीक्षण अभियंता ने गंगा के केनाल की जगह चैनल निर्माण को उपयुक्त माना। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। हालांकि यह अभी तय नहीं हो पाया है कि यह चैनल मिथिला हाट स्थल, कल्पवास क्षेत्र या किस क्षेत्र से निकाला जाएगा।
क्यों पड़ी इस तरह की जरूरत
एमएलसी सर्वेश कुमार ने बताया कि योजना के अनुसार गंगा के मुख्य धारा से गंगा जल लिफ्ट कर चैनल के माध्यम से बहाया जाएगा। इससे बूढ़े, बच्चे व महिलाओं को गंगा स्नान करने में सुविधा होगी। साथ ही गंगाजल लिफ्ट करते समय पानी के स्वच्छता की व्यवस्था रहेगी। उन्होंने बताया कि चैनल में पौड़ी का निर्माण होगा। पूरे साल चैनल में बहता पानी (गंगा जल) एक लेवल में मिलेगा। सिमरिया धाम में जब लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है उस समय में लोगों को सुविधा मिलने के साथ ही प्रशासन को भी भीड़ को नियंत्रित करना आसान हो जाएगा।
अगर ऐसा हुआ तो चैनल कैसे काम करेगा
यह लिफ्ट सिस्टम आधुनिक तकनीक का उपयोग करके एक पुरानी समस्या का समाधान है। गंगाजल को नदी से लिफ्ट करने के लिए ‘इंटेक’ संरचना स्थापित की जाएगी। इसका उद्देश्य नदी से पानी को खींचना रहेगा। इस इंटेक में शक्तिशाली विद्युत मोटरों के अलावा पंप सेट लगेगा। मोटर भारी मात्रा में गंगा जल को नदी से खींचेगा। पानी को प्रेशर पाइपलाइनों से घाट के ऊंचे स्तर पर पहुंचाया जाएगा। क्योंकि नदी घाट के स्तर से नीचे होती है इसलिए पानी को ऊपर उठाने के लिए प्रेशर पाइप काफी सहायक सिद्ध होगा। इसी पानी को खुले, कंक्रीट से बने ‘चैनल’ में छोड़ा जाएगा। यह चैनल घाट की सीढ़ियों के समानांतर और श्रद्धालुओं के स्नान क्षेत्र तक फैला होगा। वाराणसी के ललिता घाट पर बना गंगा जल लिफ्ट सिस्टम इसका बेहतरीन उदाहरण है।
सवाल : चैनल का पानी फिर नदी में कैसे जाएगा
घाट की सीढ़ियां और चैनल नदी की तरफ ढलानदार बनाए जाएंगे। जैसे ही चैनल में पानी का स्तर बढ़ेगा यह अपने आप गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे की तरफ बहने लगेगा। श्रद्धालुओं के स्नान क्षेत्र के ठीक नीचे, जहां चैनल समाप्त होगा वहां कंक्रीट की संरचना को इस तरह बनाया जाएगा कि बहता हुआ पानी सीधे मुख्य घाट की सीढ़ियों से होते हुए गंगा नदी की मुख्य धारा में गिर जाए।
प्रोजेक्ट खर्चीला, मगर भविष्य के लिए लाभकारी
अगर यह प्रोजेक्ट मूर्त रूप लेता है तो निश्चित रूप से भारी-भरकम राशि खर्च होगी। क्योंकि नदी से पानी को लिफ्ट करने के लिए लगाए जाने वाले मोटर और पंप बहुत महंगे होते हैं। प्रेशर पाइपलाइन, कंक्रीट चैनल, इंटेक निर्माण में उच्च गुणवत्ता का खास ख्याल रखना होगा। सबसे जरूरी बात कि पंपों को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। जब तक पंप चलेगा बिजली खर्च होती रहेगी। बिजली कटने की स्थिति में पंप को चालू रखने के लिए बड़े डीजल जनरेटर और ईंधन की आवश्यकता होगी जो परिचालन लागत को और बढ़ा देगा।
जानिए, क्यों महत्वपूर्ण है ऐसा करना
  1. हर समय पानी की उपलब्धता : गंगा का जल स्तर मौसम के साथ बदलता रहता है। गर्मी के दिनों में अक्सर घाट की सीढ़ियां पानी से काफी ऊपर रह जाती हैं। यह प्रणाली सुनिश्चित करेगी कि श्रद्धालुओं को साल भर, चौबीसों घंटे स्नान के लिए घाट पर ही गंगा जल मिले।
  2. स्वच्छता : पंप किया गया पानी सीधे मुख्य नदी से आएगा और चैनल में बहता रहेगा। ऐसा होने से स्नान क्षेत्र में पानी स्थिर नहीं रहेगा। गंदगी जमा होने की संभावना बहुत कम रहेगी। श्रद्धालु स्वच्छ और स्वास्थ्यकर स्नान कर  सकेंगे।
  3. भीड़ प्रबंधन : चैनल में बहता हुआ पानी घाट के बड़े हिस्से में उपलब्ध होता है। इससे स्नान के लिए भीड़ एक ही जगह जमा नहीं होगी, बल्कि पूरे घाट पर फैलेगी। यह भीड़ प्रबंधन में काफी मदद करेगा, विशेष रूप से त्योहारों और पर्वों के दौरान।
  4. बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सुविधा : मुख्य नदी तक पहुंचने के लिए बुजुर्गों और दिव्यांगों को अक्सर कई सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं। यह प्रणाली उन्हें घाट के ऊपर ही स्नान की सुविधा प्रदान करेगी, जिससे उन्हें बहुत राहत मिलेगी।

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शेखर

पत्रकारिता ही की है अब तक।
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