- दोषी विकास सिंह फिलहाल बेउर जेल में है बंद
- साल 2019 में दीपावली की रात की गई थी हत्या
- चार बीघा जमीन को लेकर चल रहा था विवाद
बेगूसराय | व्यवहार न्यायालय के एडीजे-3 ब्रजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को तिहरे हत्याकांड में दोषी विकास सिंह को फांसी की सजा सुनाई। विकास फिलहाल चाचा-चाची हत्याकांड मामले में बेउर जेल में बंद है। सजा बुधवार को ही सुनाई जानी थी, लेकिन बेउर जेल से समय पर नहीं आने के कारण गुरुवार 12 फरवरी 2026 को सजा सुनाई गई। घटना सिंघौल ओपी क्षेत्र के मचहा गांव की थी।
दीपावली की रात भाई-भाभी और भतीजी को मार डाला था
दोषी विकास ने दीपावली की रात 27 अक्टूबर 2019 को भाई कुणाल कुमार (40), भाभी कंचन देवी (35)और भतीजी सोनम कुमारी (17) की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसने भतीजे शिवम कुमार पर भी फायरिंग की थी, लेकिन मिस फायर गया और शिवम ने भाग कर जान बचाई थी। विकास के भागने के बाद शिवम घर आया तो मां-पापा और बहन की खून से सनी लाश देखी। शिवम के आवेदन पर ही मामला दर्ज हुआ था। पुलिस को घटनास्थल से 16 खोखे मिले थे।

घटना के चार दिन बाद देवघर से गिरफ्तार हुआ था विकास
तीन लोगों की हत्या करने के बाद विकास देवघर भाग गया था। तत्कालीन एसपी अवकाश कुमार के नेतृत्व में बनी टीम ने विकास को चार दिन देवघर से धर दबोचा।
पहले चाचा, फिर चाची और अंत में भाई-भाभी और भतीजी की हत्या
ट्रिपल मर्डर से पहले विकास ने चार बीघा भूमि विवाद में वर्ष 2012 में चाचा अरुण सिंह की हत्या कर दी थी। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी। हाई कोर्ट के फर्जी बेल कागजात पर वह जेल से बाहर आ गया। उसने चाची मुन्नी देवी पर गवाही नहीं देने का दबाव बनाया। चाची जब नहीं मानी तो जून 2017 में उसके घर के दरवाजे पर गोली मारकर उसे मौत की नींद सुला दी। फिर 2019 में अपने भाई भाभी भतीजी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि ये लोग चाचा-चाची से सहानुभूति रखते थे। मुन्नी देवी की हत्या का मामला भी न्यायालय में लंबित है।
अभियोजन की मजबूत पैरवी
मामले में सरकारी अधिवक्ता राम प्रकाश यादव ने बताया कि न्यायालय ने इस घटना को हिनियस क्राइम (जघन्य अपराध) करार दिया। एडीजी-3 न्यायालय के न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह ने सत्रवाद संख्या-465/21 में आरोपी विकास कुमार को फांसी की सजा दी है। इस मामले में छह गवाहों बाबू साहब सिंह, विजय सिंह, डॉक्टर संजय कुमार, सत्यम कुमार, प्रत्यक्षदर्शी शिवम कुमार तथा अनुसंधानकर्ता मनीष कुमार सिंह की गवाही कराई गई। सभी गवाहों ने घटना का समर्थन किया।










