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तीन माह के भीतर निपटाना होगा भूमि विवाद का मामला

  • अपर समाहर्ता, अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता को दिए गए निर्देश
  • राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा- हर हाल में होगा नियम का पालन
  • बिहार भूमि पोर्टल पर लंबित वादों के समय-सीमा में निष्पादन का सख्त निर्देश

पटना | उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निष्पादन में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरसीएमएस/बिहारभूमि पोर्टल पर दर्ज मामलों का निर्धारित समय-सीमा में निष्पादन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। जनता के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा।

इस संबंध में विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने पत्र जारी स्पष्ट कहा कि आरसीएमएस/बिहारभूमि पोर्टल पर दायर मामलों की नियमित समीक्षा एवं प्रभावी पर्यवेक्षण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय मिले। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालयों में वादों की सुनवाई एवं आदेश पारित करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने दो प्रमुख लैटिन सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने की हिदायत दी है।

इन सिद्धांतों से न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने की हिदायत
पहला सिद्धांत Audi Alteram Partem है, जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को सुने बिना दंडित नहीं किया जा सकता। प्रत्येक पक्ष को अपना पक्ष रखने, साक्ष्यों का प्रतिवाद करने और निर्णय से पूर्व अपनी सफाई प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
दूसरा सिद्धांत Nemo Debet Esse Judex in Propria Sua Causa है, जिसका आशय है कि कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। यह सिद्धांत न्यायिक प्रक्रिया को पक्षपात से मुक्त रखने की आधारशिला है।
अनावश्यक विलंब से आमलोगों को परेशानी
उन्होंने कहा है कि विभागीय समीक्षा में पाया गया है कि अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता तथा अपर समाहर्ता के न्यायालयों में कई राजस्व वाद निर्धारित समय-सीमा के बावजूद लंबित हैं। विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत इन वादों के निष्पादन की समय-सीमा पूर्व से निर्धारित है, फिर भी अनावश्यक विलंब हो रहा है। इससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
वादों के निष्पादन के लिए तय समय-सीमा
अंचल अधिकारी न्यायालय में
  • भूमि दाखिल-खारिज (बिना आपत्ति) :– 35 दिन
  • भूमि दाखिल-खारिज (आपत्ति सहित) :75 दिन
  • लोक भूमि अतिक्रमण वाद :– 90 दिन
  • भू-मापी वाद :7 से 11 दिन
भूमि सुधार उप समाहर्ता न्यायालय में
  • दाखिल-खारिज अपील30 दिन
  • भूमि विवाद निराकरण90 दिन
  • लगान निर्धारण90 दिन
  • बकास्त रैयतीकरण90 दिन
  • दान-पत्र सम्पुष्टि90 दिन
  • 48(E) बटाईदारी वाद90 दिन
अपर समाहर्ता न्यायालय में
  • जमाबंदी रद्दीकरण30 दिन
  • बंदोबस्ती अपील90 दिन
  • लगान निर्धारण अपील90 दिन
  • भू-हदबंदी अधिनियम, 1961 से संबंधित वाद90 दिन
  • बिहार भू-दान यज्ञ अधिनियम, 1954 से संबंधित वाद90 दिन
  • दाखिल-खारिज रिवीजन अपील30 दिन
नियमित मॉनिटरिंग का निर्देश
प्रधान सचिव ने सभी समाहर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने न्यायालयों के साथ-साथ अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की सतत समीक्षा करें और समय-सीमा का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही, मामलों के निष्पादन की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाए।
स्टे ऑर्डर वाले मामले ही माने जाएंगे ‘लंबित’
प्रधान सचिव सीके अनिल ने कहा कि ‘लंबित’ का अर्थ केवल वही मामले होंगे, जिनमें सक्षम न्यायालय द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत अस्थायी निषेधाज्ञा (Stay Order/Temporary Injunction) जारी हो। समाहर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर अधिकतम तीन माह के भीतर वादों के निष्पादन को सुनिश्चित करें।

 

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विजय झा

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