- एक सप्ताह पहले बेगूसराय आए थे भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सह बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े
- भाजपा के पूर्व एमएलसी के होटल में ही विधानसभावार संगठन की चर्चा की
- पार्टी के अधिसंख्य कार्यकर्ताओं ने नगर विधायक कुंदन कुमार के खिलाफ जताई नाराजगी
- तावड़े ने एक कहानी के माध्यम से विधायक और टिकट चाहने वालों को दी राजनीतिक खुराक
बेगूसराय | राजनीति में कौन सा प्यादा (कार्यकर्ता) कहां फिट हो जाएगा या फिर कौन सा प्यादा बाजी मार ले जाएगा, इसकी भविष्यवाणी शायद ही कोई कर सके। खासकर वर्तमान राजनीति में भाजपा के लिए कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है। एक सप्ताह पहले 9 मार्च को भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सह बिहार भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े बेगूसराय आए थे। उन्होंने फगुनाहट वाले मौसम में कार्यकर्ताओं से खुलकर बात की। पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने भी होली के बहाने ही सही नगर विधायक कुंदन कुमार के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकाली। स्पष्ट शब्दों में कहा कि विधायक ‘कुंदन’ नहीं बन पाए। उनकी कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए। तावड़े ने भी एक कहानी सुनाते हुए बातों ही बातों में कुंदन कुमार समेत अन्य विधायकों और पार्टी से टिकट चाहने वालों को नसीहत दी है।
दफ्तर और क्षेत्र में नहीं मिलते हैं विधायक
कार्यकर्ताओं ने विधायक कुंदन कुमार पर आरोप लगाया कि उन्हें पटना में सरकारी आवास की सुविधा दी गई, मगर उन्होंने सुविधा नहीं ली। आवास भत्ता के रूप में वे 60 हजार रुपए प्रतिमाह उठा रहे हैं। बेगूसराय स्थित अपने आवास पर किसी से मिलते तक नहीं। क्षेत्र में तो शायद ही दिखते हैं। महीने-दो महीने में दो-चार दिन ही दिखते हैं। बेगूसराय में जो दफ्तर बना रखा है वहां भी एक-दो दिन घंटे भर के लिए ही बैठते हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि कुंदन कुमार ने अपने हलफनामे में खुद को सोशल वर्कर और बिजनेसमैन बता रखा है।
जानिए, तावड़े ने कौन सी कहानी सुनाई
विनोद तावड़े ने कोर कमेटी के सदस्यों को कहानी सुनाई। कहा कि वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के चुनाव प्रभारी थे। राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू का दूर-दूर तक कोई नाम नहीं था। एक दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्रौपदी मुर्मू के घर फोन किया। हाल-चाल लेने के बाद उन्होंने कहा कि आपकी आवश्यकता दिल्ली में है। द्रौपदी मुर्मू ने समझा कि उन्हें किसी निगम या बोर्ड में अध्यक्ष बनाया जा रहा है, इसलिए मना कर दिया। कुछ समय बाद जब समाचार चैनल और अन्य सोशल मीडिया पर द्रौपदी मुर्मू का नाम राष्ट्रपति पद के लिए चलने लगा और लोग बधाई देने लगे तब द्रौपदी मुर्मू को पता चला कि भाजपा ने उनका नाम राष्ट्रपति पद के लिए तय किया है।
संदेश का सार समझिए…
कहानी के संदेश का सार बड़ा ही गूढ़ है। इसे बारीकी से समझना होगा। बात शुरू करते हैं विधायक कुंदन कुमार से। विधायक बनने के लिए उन्होंने टिकट कैसे हासिल किया, जनता भी भलीभांति जानती है। हालांकि कुंदन कुमार निश्चिंत हैं कि गणेश परिक्रमा का सुफल मिलना ही है। यहां यह गौर करने वाली बात होगी कि विधायक कुंदन कुमार, तावड़े के इस डोज का एंटीडोज संबंधों के गठजोड़ से तैयार कर पाएंगे या नहीं? अब बात पूर्व एमएलसी रजनीश कुमार की। रजनीश कुमार भी बेगूसराय से विधानसभा का टिकट चाह रहे हैं। वे पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय मंत्री और प्रदेश महामंत्री रह चुके हैं। तावड़े, उन्हीं के होटल में ठहरे थे और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी। मैसेज उनके लिए भी है। तावड़े का यह संदेश केवल इन्हीं दोनों के लिए ही नहीं वरन पार्टी के उन सभी नेताओं के लिए है जो रजौड़ा में आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुए थे।
