बेगूसराय (बीहट) | रामधारी सिंह दिनकर की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी। भारत में जितने भी बड़े नाम हैं उनकी खूबी यह है कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि ये मेरे मौलिक विचार हैं। बल्कि कहा कि यह भारतीय संस्कृति के परंपराओं के मौलिक विचार हैं। ये बातें राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आदर्श ग्राम सिमरिया स्थित दिनकर प्लस टू विद्यालय में आयोजित 117वीं दिनकर जयंती समारोह में कही। उन्होंने कहा कि मेरी उतनी योग्यता नहीं कि उनके साहित्य की समीक्षा करूं। इससे पहले जिलाधिकारी तुषार सिंगला ने पुष्प गुच्छ देकर राज्यपाल का स्वागत किया। इसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राज्यपाल ने स्कूल परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। उन्होंने सिमरिया ग्राम में स्थापित दिनकर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया।
दिनकर की कविताओं से पूरा देश प्रेरणा लेता है : समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि यह वह धरती है जिसने दिनकर जैसे पुत्र को पैदा किया। भारतीय संस्कृति की समझ को पैदा करने के लिए उनकी पुस्तक मील का पत्थर है। आज भी पूरे भारत में उनकी कविताओं से प्रेरणा ली जाती है। दिनकर जी ने अपनी रचनाओं में देश को सबल बनाने की भावनाओं का संचार किया।
दिनकर की रचनाएं पाठ्यक्रम में फिर से शामिल हो : केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि 1990 से पहले स्कूलों में दिनकर जी की रचनाओं को पढ़ाया जाता था, लेकिन अब उसे बंद कर दिया गया है। उन्होंने राज्यपाल से इसे फिर से पाठ्यक्रम में शामिल करने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिनकर जी लेखनी के धनी थे। दिनकर का मतलब साधना से भरा हुआ जीवन है। दिनकर का मतलब संकल्प, जिन्होंने संकल्पित जीवन जिया और पूरे जीवन साहित्य और देश के प्रति समर्पित था। गिरिराज सिंह ने कहा कि सिक्स लेन ब्रिज का नाम दिनकर सेतु हो और मिथिला हाट की तर्ज पर दिनकर सिमरिया हाट हो। इस प्रस्ताव का राज्यपाल ने भी समर्थन किया।

दिनकर जी के प्रपौत्र ने राज्यपाल को सम्मानित किया : दिनकर जी के परपौत्र ऋतिक उदयन ने राज्यपाल को शॉल और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम को दरभंगा स्नातक क्षेत्र के विधान पार्षद सर्वेश कुमार, बेगूसराय विधायक कुंदन कुमार, मटिहानी विधायक सर्वेश कुमार ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृष्ण कुमार शर्मा ने की।











