बेगूसराय | गंगा ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर एजुकेशन (बीएड कॉलेज) के दिनकर सभागार में 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर समारोह का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. नीरज कुमार एवं प्राध्यापकों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. कामायनी ने कहा कि हमारे जीवन में मातृभाषा का बहुत महत्व है। हमें अपने सगे-संबंधियों के साथ अपनी मातृभाषा में बातचीत करनी चाहिए।
देश को विकसित देश बनाने में मातृभाषा का महत्वपूर्ण योगदान
प्राचार्य डॉ. नीरज कुमार ने मातृभाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षुओं से कहा कि कई देश को विकसित देश बनाने में मातृभाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मातृभाषा संवाद स्थापित करने में न सिर्फ सुगम होता है बल्कि क्षेत्र के लोगों के दिलों को भी आपस में जोड़ने का काम करता है। सहायक प्राध्यापक परवेज़ यूसुफ़ ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण में प्रदर्शनकारी कला का उपयोग करने से उनमें व्यक्तित्व तथा संवाद कौशल का विकास बहुत तेजी से होता है उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है।

मातृभाषा व्यक्ति के जीवन को सहज़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रो. विपिन कुमार ने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी प्रशिक्षुओं का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति के जीवन को सहज़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए अपनी मातृभाषा को बोलने व लिखने में अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए। मंच संचालन रौशनी सिन्हा एवं निधि कुमारी ने संयुक्त रूप से किया। कोमल कुमारी ने मातृभाषा की उत्पत्ति के साथ उसके महत्त्व को विस्तार से बताया।
दो लघु नाटकों का मंचन
कार्यक्रम के दौरान पुष्पिता, कोमल, काजल, शिप्रा, भानु, सौर्या, साक्षी रानी, राजन, रितेश, ऋषभ, मनीषा, मुस्कान, सोनाली, सोनी, कंचन, आरती, रानी, जूली, स्वेता, जूही, नेहा, पूजा, रेखा, मिट्ठू, सपना, कोमल, सिद्धि ने। कविता प्रस्तुत किया श्रवण कुमार, सोनम प्रिया ने मातृभाषा में लोकगीत प्रस्तुत किया। जबकि दो लघु नाटक- मन की भाषा और मातृभाषा के मान की प्रस्तुति हुई। नाटक में भूमिका का निर्वाह पुष्पिता, कोमल, आशु राज, स्वेता राज, कोमल कुमारी तथा सिद्धि, गोविंद, सोनम, इफत, मन्नू , स्वीटी, रिचा, ऋषभ ,मनीषा, सोनाली, रितेश चंदन, अंजली ने किया। सहायक प्राध्यापक डॉ अंजली ने अपने विचारों को व्यक्त किया तथा प्रो अमर कुमार ने मातृभाषा में लोकगीत प्रस्तुत किया। उक्त अवसर पर प्राध्यापकों के साथ प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के सैकड़ों प्रशिक्षु उपस्थित थे।










