बेगूसराय | जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री के मार्गदर्शन में जिले में ‘पोषण पखवाड़ा 2026’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया। समेकित बाल विकास परियोजना कार्यालय बेगूसराय के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान को स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग तथा जीविका के सहयोग से व्यापक जन-अभियान का स्वरूप दिया जा रहा है। अभियान के प्रथम दिन जिले के सभी 3360 आंगनबाड़ी केंद्रों पर जागरूकता रैलियों एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कुपोषण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा बच्चों, किशोरियों एवं गर्भवती महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य एवं पोषण को सुनिश्चित करना है।

मानसिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित करना उद्देश्य
इस अवसर पर जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आइसीडीएस) ने कहा कि पोषण पखवाड़ा का उद्देश्य केवल शारीरिक कुपोषण को समाप्त करना ही नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को भी सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि इस बार अभियान के दौरान विशेष रूप से डिजिटल डिटॉक्स और परिवारिक संवाद जैसे विषयों पर घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों से लैस कर उन्हें बच्चों के समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

गांव-गांव में ‘पोषण चौपाल’ का आयोजन
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्वास्थ्य संस्थानों पर आई गर्भवती महिलाओं को पोषण के प्रति जागरूक करते हुए शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही जीविका दीदियों, स्वयंसेवी संगठनों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से गांव-गांव में ‘पोषण चौपाल’ का आयोजन किया जा रहा है, ताकि पोषण के प्रति जागरूकता को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके। जिला प्रशासन ने सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं आम नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है, ताकि स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और जागरूक बेगूसराय के निर्माण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
इस वर्ष पोषण पखवाड़ा 2026 को केवल आहार तक सीमित न रखते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अंतर्गत पांच प्रमुख आयामों को अभियान का आधार बनाया गया है।
- पहला : पोषण (स्थानीय एवं मौसमी आहार) के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं एवं शिशुओं के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फल-सब्जियों एवं संतुलित आहार के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- दूसरा : संवाद (रिश्तों की गर्माहट) के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों के साथ नियमित संवाद और गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे उनके मानसिक एवं भावनात्मक विकास को बल मिल सके।
- तीसरा : शिक्षा (खेल-खेल में सीखना) के तहत बच्चों को खेल, गतिविधियों और रंग-बिरंगे शिक्षण सामग्री के माध्यम से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रारंभिक शिक्षा आनंददायक और प्रभावी बन सके।
- चौथा : डिजिटल डिटॉक्स (तकनीक से दूरी) के अंतर्गत बच्चों को मोबाइल एवं टीवी के अत्यधिक उपयोग से दूर रखते हुए उन्हें खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक सहभागिता की ओर प्रेरित किया जा रहा है।
- पांचवां : सशक्तीकरण (आधुनिक आंगनबाड़ी) के माध्यम से जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित कर उन्हें प्रभावी लर्निंग सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।








