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Asha Bhosle Death: आशा भोसले का 92 की उम्र में निधन, कल होगा अंतिम संस्कार

नई दिल्ली/एजेंसी | भारत की प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले का 92 की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने 12 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें 11 अप्रैल की देर शाम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। न्यूज एजेंसी पीटीआइ के अनुसार, उनके बेटे आनंद ने खबर दी कि राष्ट्रीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क में कल 4 बजे अंतिम संस्कार होगा। हालांकि निधन से कुछ घंटे पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके स्वस्थ होने की कामना की थी। उन्होंने एक्स पर लिखा था कि यह सुनकर चिंता में हूं कि आशा भोसले जी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके अच्छे स्वास्थ्य और जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। इधर, सोशल मीडिया पर शोक की लहर है। वहीं फैंस और सेलेब्स सोशल मीडिया के जरिए रिएक्शन देते हुए नजर आ रहे हैं।

12 हजार से अधिक गाने गाए
आशा भोसले ने अपने करियर में आठ दशकों से भी ज्यादा समय तक संगीत जगत में योगदान दिया। उन्होंने अपने करियर में तकरीबन 12 हजार से ज्यादा गाना गाए हैं, जिनमें ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘ये मेरा दिल’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘इन आंखों की मस्ती के’, ‘दिल चीज क्या है’ जैसे सुपरहिट गाने शामिल हैं। उन्होंने गजल, भजन, पॉप और क्लासिकल हर शैली में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्होंने ओपी नैयर, आरडी बर्मन और एआर रहमान के साथ मिलकर कई यादगार गीत दिए। उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार, फिल्मफेयर अवॉर्ड, दादासाहेब फाल्के सम्मान और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। आशा भोसले पहली भारतीय सिंगर थीं जो ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुई थीं। उन्होंने 20 से ज्यादा भाषाओं में गाना गाया था।

संयोग: दोनों बहनों का 92 की उम्र में निधन
यह एक संयोग ही है कि सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर और उनकी बहन आशा भोसले का निधन 92 की उम्र में हुआ। दोनों बहनों ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। आशा भोसले को जहां कार्डियक अरेस्ट और सांस लेने में तकलीफ (चेस्ट इंफेक्शन) के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था वहीं लता मंगेशकर को कोरोना (COVID-19) और निमोनिया के कारण भर्ती कराया गया था। लता मंगेशकर का अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया था। आशा भोसले का भी अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
आशा भोसले और लता मंगेशकर
  1. दादा साहब फाल्के पुरस्कार: दोनों बहनों को भारतीय सिनेमा के इस सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। लता जी को यह सम्मान 1989 में मिला, जबकि आशा जी को 2000 में इससे सम्मानित किया गया।
  2. अवॉर्ड्स लेने से इनकार: एक समय के बाद दोनों बहनों ने नए गायकों को मौका देने के लिए अवॉर्ड्स स्वीकार करना बंद कर दिया था। लता जी ने 1968 के बाद फिल्मफेयर अवॉर्ड्स लेने से मना किया, और उनकी राह पर चलते हुए आशा जी ने भी 1978 के बाद इन्हें स्वीकार करना बंद कर दिया।
  3. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: दोनों बहनों के नाम दुनिया में सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा है। पहले यह रिकॉर्ड लता जी के नाम था, और बाद में 2011 में आशा जी को दुनिया की सबसे अधिक रिकॉर्डेड आर्टिस्ट के रूप में मान्यता मिली।
  4. शुरुआती संघर्ष और पहली फिल्म: 1942 में पिता दीनानाथ मंगेशकर के निधन के बाद दोनों को बहुत कम उम्र में काम करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने अपनी पहली फिल्म ‘बड़ी मां’ (1945) में एक साथ छोटी भूमिकाएं निभाई थीं और गाने भी गाए थे।
  5. साझा संगीत निर्देशक: हालांकि दोनों के गाने का अंदाज अलग था (लता जी को अक्सर मधुर और आशा जी को वर्सेटाइल गीतों के लिए जाना जाता था), लेकिन उन्होंने लगभग सभी दिग्गज संगीतकारों जैसे आरडी बर्मन, एसडी बर्मन और नौशाद के साथ समान रूप से काम किया।
  6. सफेद साड़ियों का प्रेम: दोनों बहनों को अक्सर सफेद साड़ियां पहने देखा जाता था। आशा जी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें लगता था कि सफेद रंग उनके रंग-रूप पर बहुत फबता है।
  7. रिश्तों में दरार और सुलह: 16 साल की उम्र में आशा जी ने लता जी के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली थी। इस वजह से लता जी उनसे काफी नाराज थीं और सालों तक दोनों के बीच बातचीत बंद रही थी। हालांकि, बाद में उनके रिश्ते फिर से मधुर हो गए थे।
  8. पड़ोसी बनकर रहना: एक समय ऐसा भी था जब दोनों बहनें मुंबई में बिल्कुल बगल वाले अपार्टमेंट में रहती थीं। उनके घरों के बीच एक साझा दरवाजा भी था, जिससे वे एक-दूसरे के घर बिना बाहर निकले आ-जा सकती थीं।
  9. 50 से अधिक युगल गीत: भले ही दोनों के बीच प्रोफेशनल स्तर पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा मानी जाती थी, लेकिन उन्होंने एक साथ लगभग 50-55 यादगार गाने गाए हैं, जिनमें ‘मन क्यों बहका’ और ‘छाप तिलक सब’ जैसे कालजयी गीत शामिल हैं।

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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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