- परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ इसरो बना रहा खास हीटिंग सिस्टम
बेंगलुरु/एजेंसी | भारत चंद्रमा पर लंबे समय तक काम करने वाले लैंडर की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिससे भविष्य के लूनर लैंडर चांद पर 14 दिनों के बजाय 100 से 200 दिनों तक सक्रिय रह सकेंगे। इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने शनिवार को बताया कि इसरो और परमाणु ऊर्जा विभाग मिलकर एक उन्नत आर्टिफिशियल हीटिंग सिस्टम विकसित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य चंद्रमा की बेहद ठंडी रातों में अंतरिक्ष यानों को सुरक्षित रखना है।
चांद की रात सबसे बड़ी चुनौती
चंद्रमा पर एक दिन और एक रात, दोनों की अवधि पृथ्वी के लगभग 14 दिनों के बराबर होती है। रात के समय वहां तापमान माइनस 200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस दौरान सूर्य की रोशनी नहीं मिलती। सोलर पैनल बिजली बनाना बंद कर देते हैं। नतीजतन, लैंडर और उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण काम करना बंद कर देते हैं।

हीटर बचाएगा स्पेसक्राफ्ट
इसरो ऐसा आर्टिफिशियल हीटर विकसित करना चाहता है जो चंद्र रात के दौरान स्पेसक्राफ्ट के महत्वपूर्ण हिस्सों को गर्म रख सके। इससे उपकरण ठंड से खराब नहीं होंगे। यदि यह तकनीक सफल रही तो भविष्य के भारतीय लैंडर कई चंद्र-दिवस और चंद्र-रात झेल सकेंगे। इससे मिशन की अवधि कई गुना बढ़ जाएगी।
वैज्ञानिकों को मिलेगा ज्यादा समय
लंबी अवधि तक सक्रिय रहने वाले लैंडर वैज्ञानिकों को अधिक प्रयोग करने का अवसर देंगे। साथ ही चंद्रमा से ज्यादा वैज्ञानिक आंकड़े और महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा सकेंगी।

चंद्रयान-3 ने रचा था इतिहास
भारत ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के जरिए इतिहास रचा था। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। मिशन का विक्रम लैंडर लगभग एक चंद्र-दिवस, यानी पृथ्वी के 14 दिनों तक ही काम कर सका। इसके बाद चंद्रमा पर रात शुरू हो गई। सूरज की रोशनी खत्म होने और अत्यधिक ठंड के कारण उसके सिस्टम सक्रिय नहीं रह पाए। अब इसरो की नई तकनीक भविष्य के चंद्र मिशनों को कहीं अधिक लंबा और प्रभावी बना सकती है।










