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बस बनी प्रयोगशाला, मध्य विद्यालय बीहट के छात्रों ने देखी ‘प्रयोगों की दुनिया’

  • बिहार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की पहल पर बीहट विद्यालय पहुंची ‘साइंस बस
  • 500 छात्रों ने 4 घंटे तक किया ‘अनुभवों का विज्ञान’

बेगूसराय (बीहट) | किताबों में पढ़े गए विज्ञान के कठिन सिद्धांतों को जब बच्चों ने अपनी आंखों के सामने ‘जीते-जागते’ देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। अवसर था मध्य विद्यालय बीहट में ‘भ्रमणशील विज्ञान प्रदर्शनी बस’ के आगमन का। बिहार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर अभियंत्रण महाविद्यालय, बेगूसराय द्वारा संचालित इस पहल ने बीहट के छात्रों में वैज्ञानिक चेतना का नया संचार किया है। कक्षा 6 से 8 तक के लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने करीब चार घंटे तक बस में मौजूद वैज्ञानिक मॉडलों का अवलोकन किया। यह मात्र एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि एक चलती-फिरती प्रयोगशाला थी जहां गणित, भौतिकी और जीवविज्ञान के जटिल पाठ आसान प्रयोगों में बदल गए थे।

इन प्रयोगों ने खींचा ध्यान
बच्चों ने ऑप्टिक इल्यूजन (दृष्टि भ्रम), प्रकाश परावर्तन, चुंबकीय ऊर्जा, विद्युत परिपथ और मानव ज्ञानेंद्रियों की कार्यप्रणाली को लाइव मॉडलों के जरिए समझा। ज्यामितीय आकृतियों और दोलन से जुड़े प्रयोगों ने नन्हे दिमागों में छिपी जिज्ञासा को नई उड़ान दी।
एक विजनरी पहल
परियोजना निदेशक डॉ. अनंत कुमार के मार्गदर्शन में यह विज्ञान बस 17 अप्रैल से 21 अप्रैल तक जिले के विभिन्न माध्यमिक, उच्च एवं इंटरमीडिएट विद्यालयों में भ्रमण कर रही है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अभिषेक शर्मा ने बताया कि इस बस सेवा का शुभारंभ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 सितंबर को पटना तारामंडल परिसर में किया था। तब से यह सेवा राज्य के विभिन्न जिलों में छात्रों को विज्ञान के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करने का कार्य कर रही है। इस योजना का उद्देश्य विज्ञान को कक्षा की चारदीवारी से निकालकर छात्रों के अनुभव की दुनिया में लाना है।

रोमांच और जिज्ञासा का संगम
बस के भीतर सजी विज्ञान की दुनिया ने बच्चों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रकाश परावर्तन की बारीकियां हों या ऑप्टिक इल्यूजन का जादू, चुंबकीय ऊर्जा का आकर्षण हो या विद्युत परिपथ की कार्यप्रणाली—हर प्रदर्श को देख बच्चों की आंखें कौतूहल से चमक उठीं। ज्यामितीय आकृतियों, दोलन और ज्ञानेंद्रियों की कार्यक्षमता को प्रयोगात्मक रूप में देख छात्रों में एक नई जिज्ञासा पैदा हुई। बच्चों का यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि किताबी शिक्षा जब प्रयोगों से जुड़ती है तो वह अधिक प्रभावी और जीवंत बन जाती है।
सफल संचालन के सूत्रधार
इस शैक्षणिक यात्रा को सफल बनाने में वरिष्ठ स्नातक शिक्षक अनुपमा सिंह, शिक्षक गौरव रौशन व प्रीति कुमारी के साथ समन्वयक डॉ. रजनीश कुमार ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही टीम लीडर विश्वंकर कुमार, टेक्नीशियन जगन्नाथ कुमार और चालक धर्मेंद्र कुमार का योगदान सराहनीय रहा। कार्यक्रम संयोजक रोहित कुमार ने इस पहल के दूरगामी प्रभाव पर जोर देते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य छात्रों को केवल शिक्षित करना नहीं, बल्कि उनमें अनुसंधान की प्रवृत्ति जगाना है। प्रयोग-आधारित यह शिक्षा उन्हें भविष्य में नवाचार और समाजोपयोगी कार्यों के लिए तैयार करेगी।”
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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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