- तीन लोन डिफाल्टर छात्रों के घर कुर्क करने की तैयारी
- 2888 लाभार्थियों पर 67.08 करोड़ बकाया
- केस दर्ज होने के बाद ₹2.51 करोड़ वसूले
- ऋण नहीं चुकाने वाले 631 और लाभार्थियों पर केस की तैयारी
बेगूसराय | बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लोन डकारने वालों की अब खैर नहीं है। सरकार ने लोन न चुकाने और पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों पर शिकंजा कस दिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने बेगूसराय में बड़े पैमाने पर रिकवरी अभियान शुरू कर दिया है। अब तक 1757 डिफाल्टरों को नोटिस भेजा जा चुका है। मामला सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं है। रिकवरी के लिए कुर्की-जब्ती और ‘बाडी वारंट’ जैसे सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
67 करोड़ रुपये की होनी है वसूली
जिले में कुल 2888 छात्रों से वसूली का लक्ष्य रखा गया है। इन डिफाल्टरों पर कुल 67.08 करोड़ रुपये बकाया हैं। शिक्षा वित्त निगम के सहायक प्रबंधक अजय कुमार ने बताया कि डीआरसीसी (DRCC) को रिकवरी के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
नोटिस और कोर्ट केस की स्थिति
- डीआरसीसी ने 1757 लोगों पर केस के लिए कोर्ट में अर्जी दी है।
- इन 1757 लोगों से 36.79 करोड़ रुपये की वसूली होनी है।
- इनमें 855 छात्रों को सीआरपीसी की धारा 133 के तहत नोटिस भेजा गया है।
- 850 लाभार्थियों को पहला और 249 छात्रों को अंतिम चेतावनी नोटिस मिला है।
अब 631 नए लोगों पर होगा केस
विभाग बचे हुए 1131 लोगों पर भी केस करने की तैयारी में था। इस बीच सख्ती देखते हुए 500 लोगों ने डीआरसीसी कार्यालय पहुंचकर अपना एफिडेविट (शपथ पत्र) सौंप दिया है। अब विभाग बाकी बचे 631 डिफाल्टरों पर सीधे केस दर्ज करेगा।
कुर्की-जब्ती और बाडी वारंट का आदेश
अंतिम नोटिस के बाद भी जो छात्र पैसा जमा नहीं कर रहे हैं, उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो रही है। इसी कड़ी में तीन डिफाल्टरों के खिलाफ ‘बाडी वारंट’ जारी किया गया है। (बाडी वारंट का अर्थ है कि पुलिस संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार कर सीधे न्यायालय में पेश करेगी)। इसके अलावा तीन अन्य के खिलाफ संपत्ति की कुर्की-जब्ती का आदेश भी जारी हो चुका है।
सख्ती का दिखा असर, करोड़ों की हुई रिकवरी
प्रशासन की इस सख्ती का सीधा असर वसूली पर दिख रहा है। धारा 7 के तहत नोटिस और केस दर्ज होने के बाद अब तक 2.51 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। इसके अलावा बिना केस के भी 3.23 करोड़ रुपये वसूले गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों ने नोटिस मिलने के बाद अपनी बकाया राशि जमा कर दी है, उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई रोक दी गई है।










