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स्वरोजगार की राह में रोड़ा न बनें बैंक : डीएम

  • बैंकों को तय समय-सीमा के भीतर ऋण स्वीकृति और वितरण प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
  • सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं, कारीगरों और कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनाना

बेगूसराय | जिले में रोजगार और उद्यमिता को गति देने के लिए शनिवार को कारगिल विजय सभा भवन में जिला उद्योग टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक हुई। अध्यक्षता जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने की। बैठक में स्वरोजगार से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। डीएम ने बैंक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि बिना किसी ठोस कारण के लोन के आवेदन लंबित न रखें। उन्होंने कहा कि बैंक तय समय-सीमा के भीतर ऋण स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया पूरी करें। सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं, कारीगरों और कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसलिए सभी विभाग और बैंक आपसी तालमेल से काम करें। बैठक में जिला उद्योग केंद्र (डीआइसी) की महाप्रबंधक सुश्री ज्ञानेश्वरी सहित संबंधित बैंकों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

इन योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा
  • PMEGP (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) : वर्ष 2026-27 के लिए 73 का लक्ष्य है। अब तक 49 आवेदन बैंकों को भेजे गए हैं। इनमें 14 स्वीकृत हुए हैं और 38 लंबित हैं। पोर्टल 2.0 की शुरुआत भी हो चुकी है।
  • PMFME (सूक्ष्म खाद्य उद्योग योजना) : 332 के लक्ष्य पर 152 आवेदन बैंकों को गए। 36 स्वीकृत हुए और 32 को ऋण बंटा। फिलहाल 88 आवेदन लंबित हैं।
  • पीएम विश्वकर्मा योजना : कुल 1,291 आवेदन प्राप्त हुए। स्टेज-3 में 411 को स्वीकृति मिली है। अब तक 480 ऋण स्वीकृत हुए हैं। 442 कारीगरों को ऋण देकर स्वरोजगार से जोड़ा गया।
  • मुख्यमंत्री उद्यमी योजना : वर्ष 2024-25 में चयनित 292 में से 277 को लाभ दिया गया। 287 लाभुकों को पहली किस्त के रूप में 2-2 लाख रुपये मिले। वर्ष 2025-26 के लिए लाभुकों का चयन कर प्रशिक्षण शुरू करा दिया गया है।
  • बिहार लघु उद्यमी योजना : वर्ष 2024-25 के लिए 1,775 गरीब परिवारों (आय 72 हजार/वर्ष से कम) का चयन हुआ। 1,479 को लाभ मिला। इन्हें 50-50 के बैच में प्रशिक्षण देकर पहली किस्त के 50 हजार रुपये स्वीकृत किए गए।
क्या है मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का प्रावधान
युवाओं को उद्योग लगाने के लिए 10 लाख रुपये तक की मदद तीन किस्तों में मिलती है। इसमें 50 प्रतिशत अनुदान होता है। बाकी 50 प्रतिशत राशि ब्याजमुक्त ऋण है (सामान्य कोटि के पुरुषों के लिए केवल 1% ब्याज)। इसे 7 साल में चुकाना होता है।

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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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