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लखनऊ अग्निकांड : अवैध इमारत में फंसे छात्र-शिक्षक, 15 की मौत; चार गिरफ्तार, SIT गठित

  • भवन मालिकों सहित छह के खिलाफ एफआइआर
  • मृतकों में ज्यादातर 21 से 30 वर्ष के कोचिंग छात्र
  • इमारत में चल रहा था पेट्स क्लीनिक, गेमिंग जोन, एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर और कोचिंग सेंटर
  • मुख्यमंत्री दौरा छोड़कर अलीगढ़ से घटनास्थल और फिर केजीएमयू पहुंचे

लखनऊ/एजेंसी | लखनऊ के पॉश इलाके अलीगंज में सोमवार दोपहर भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि नौ लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में कोचिंग शिक्षक, छात्र और कर्मचारी शामिल हैं। सभी की उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि शॉर्ट सर्किट के बाद लगी आग ने कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने और लिफ्ट बंद हो जाने से दूसरी मंजिल पर मौजूद लोग फंस गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो सदस्यीय एसआइटी गठित कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है।

5 बड़े अपडेट
  • शॉर्ट सर्किट से लगी आग, 15 लोगों की मौत
    सोमवार दोपहर करीब दो बजे तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत के भूतल में शॉर्ट सर्किट से आग लगी। देखते ही देखते आग पूरी इमारत में फैल गई। धुएं और दम घुटने से 15 लोगों की मौत हो गई। नौ लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
  • एक ही निकासी द्वार और बंद लिफ्ट बनी जानलेवा
    पहली और दूसरी मंजिल पर एनीमेशन सेंटर, गेमिंग जोन और कोचिंग संचालित हो रहे थे। इमारत में सीढ़ियां केवल पहली मंजिल तक थीं। दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल होता था। आग लगने के बाद लिफ्ट बंद हो गई और लोग दूसरी मंजिल पर फंस गए। अधिकतर मौतें इसी मंजिल पर हुईं।
  • बचने के लिए दूसरी मंजिल से कूदे लोग
    आग बढ़ने पर कई लोग जान बचाने के लिए इमारत से कूद गए। दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। बचाव अभियान में पुलिस, दमकल, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें शामिल रहीं। 21 दमकल गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाया गया। घायलों को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर भेजा गया।
  • 2016 में अवैध घोषित हुई थी इमारत
    जांच में पता चला है कि इस भवन को वर्ष 2016 में अवैध बताते हुए नोटिस जारी किया गया था। ध्वस्तीकरण का आदेश भी दिया गया था, लेकिन बाद में आदेश वापस ले लिया गया। भवन के बेसमेंट और भूतल पर पेट्स क्लीनिक संचालित हो रही थी।
  • चार गिरफ्तार, अधिकारियों पर भी कार्रवाई
    पुलिस ने भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला, सुरेश कुमार, पेट्स क्लीनिक संचालक रामकृष्ण उपाध्याय और गेमिंग जोन संचालक तुषाक कृष्णा जायसवाल को गिरफ्तार किया है। सहमालिक सुरेंद्र शुक्ला, धीरेन्द्र शुक्ला समेत अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। सरकार ने लखनऊ विकास प्राधिकरण, बिजली विभाग और फायर विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
अलीगंज स्थित तीन मंजिला व्यावसायिक भवन के भूतल और बेसमेंट में पेट्स क्लीनिक संचालित हो रही थी। पहली और दूसरी मंजिल पर एनीमेशन सेंटर, गेमिंग जोन और कोचिंग संस्थान चल रहे थे। दोपहर करीब दो बजे भूतल में शॉर्ट सर्किट के बाद आग लगी। कुछ ही देर में धुआं पूरी इमारत में फैल गया। इमारत में बाहर निकलने का केवल एक रास्ता था। दूसरी मंजिल तक सीढ़ियां भी नहीं थीं। लिफ्ट बंद होते ही वहां मौजूद लोग फंस गए और बड़ा हादसा हो गया।

क्यों हुई इतनी मौतें?
  1. इमारत में निकासी का केवल एक रास्ता था।
  2. दूसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां नहीं थीं।
  3. आग लगने के बाद लिफ्ट बंद हो गई।
  4. धुआं तेजी से पूरी इमारत में भर गया।
  5. दमकल के पहुंचने तक आग काफी फैल चुकी थी।
  6. भवन पहले से विवादित और अवैध निर्माण की श्रेणी में था।
मुख्यमंत्री ने बनाई एसआइटी
घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ का कार्यक्रम छोड़कर लखनऊ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और केजीएमयू में भर्ती घायलों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी प्रवीण कुमार की दो सदस्यीय एसआइटी गठित की है। टीम को सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने अपने मंगलवार के सभी कार्यक्रम भी रद्द कर दिए हैं।
मुआवजे का एलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के स्वजन को प्रधानमंत्री राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का एलान किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी हादसे पर शोक व्यक्त किया है।
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान
  • अनुछा राय, शांति नगर, अवध शिल्प ग्राम, लखनऊ
  • अनामिका सामंत, न्यू अलीपुर, कोलकाता
  • सुखमनी सिंह, आदर्श नगर, आलम बाग, लखनऊ
  • ज्योति, ज्ञान बिहार कालोनी, कमता, चिनहट लखनऊ
  • अब्दुल रहमान, चौक चौपटिया, लखनऊ
  • आदित्य श्रीवास्तव, कैथीटोला, बिसवां, सीतापुर
  • शाहनाज सिद्दिकी, बीकेटी, लखनऊ
  • भविष्य शर्मा, अलीगंज, लखनऊ
  • सोमाल्या बेरा, द्वारिका नगर, नामखाना, दक्षिण 24 परगना, बंगाल
  • सैयम बिज, गोविंद नगर, कानपुर
  • सूरज सिंह, लाल क्वार्टर, गोविंद नगर, कानपुर
  • सागर पंत, मायापुरी कालोनी, कल्याणपुर पश्चिम, लखनऊ
  • मोहम्मद अम्मार, लखपेड़ा बाग, बाराबंकी
  • निलेश कुमार, मार्टिन का पुरवा, हजरतगंज लखनऊ
  • जैनील चक्रवर्ती, कोटमा कलिरि, भालूमाडा, जिला अनुपुर, मध्यप्रदेश

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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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