- दिनकर को था उर्दू-फारसी का गहरा ज्ञान
- ‘संस्कृति के चार अध्याय’ का उर्दू अनुवाद पूरा
बेगूसराय। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली के उर्दू विभाग के प्रो. सरवर रविवार को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली सिमरिया पहुंचे। उन्होंने दिनकर के प्रतीक चिह्नों को नमन किया और उनकी महत्वपूर्ण गद्य कृति ‘संस्कृति के चार अध्याय’ से अपने जुड़ाव के स्रोत साझा किए। दिनकर आवास और दिनकर पुस्तकालय में आयोजित संस्मरण वक्तव्य में प्रो. सरवर ने कहा कि दिनकर फारसी और उर्दू के गहरे जानकार थे। इसी कारण उन्होंने ‘संस्कृति के चार अध्याय’ में हिंदुस्तानियत की मुकम्मल जमीन तैयार की। उन्होंने कहा कि दिनकर के चार अध्यायों में एक पांचवां अध्याय भी छिपा हुआ है, जिसकी आज के भारत को सबसे अधिक जरूरत है।
दिनकर आवास पर दिनकर पुस्तकालय के आरंभकर्ता सदस्य प्रो. रामाज्ञा शशिधर, दिनकर स्मृति विकास समिति के कोषाध्यक्ष रामनाथ सिंह, सचिव प्रदीप कुमार और दिनकर के पौत्र बबलू कुमार ने प्रो. सरवर को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्हें दिनकर संग्रहालय की विभिन्न वस्तुओं का भी अवलोकन कराया गया।

दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वम्भर सिंह, ग्राम रत्न राजेंद्र राय, पुस्तकालय के आरंभकर्ता सदस्य संजीव कुमार, किसान सुनील सिंह और पुस्तकाध्यक्ष विष्णुदेव राय ने प्रो. सरवर के अनुवाद कार्य ‘संस्कृति के चार अध्याय उर्फ तहजीब के चार अबवाब’ की सराहना की। उन्होंने इसके शीघ्र प्रकाशन के लिए शुभकामनाएं भी दीं। इसके बाद प्रो. सरवर अपने शैक्षिक मित्र प्रो. रामाज्ञा शशिधर के निर्माणाधीन ‘सिमरिया सांस्कृतिक केंद्र’ का अवलोकन करने गंगा तट स्थित उनके आवास पहुंचे।










