- 45 आरोपितों पर आरोपपत्र
- जांच में नहीं मिला संजीव की संलिप्तता का साक्ष्य
- बिहार पुलिस ने पहले बनाया था नामजद आरोपित
- ईओयू के अन्य पांच पेपर लीक मामलों में अब भी जेल में बंद
- नीट-यूजी 2026 विवाद के बीच फिर चर्चा में आया मामला
पटना | नीट-यूजी 2024 पेपरलीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया को क्लीनचिट दे दी है। एजेंसी का कहना है कि विस्तृत जांच और पूछताछ के बावजूद उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। इसी कारण उसके विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया। सीबीआइ ने इस मामले में कुल 45 आरोपितों के खिलाफ पटना की सक्षम अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। सीबीआइ की यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब देशभर में नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर कथित पेपरलीक विवाद चर्चा में है। ऐसे में वर्ष 2024 के मामले में संजीव मुखिया का नाम फिर सुर्खियों में आ गया है।
सीबीआइ के अनुसार, जांच के दौरान पूरे षड्यंत्र और उसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान कर ली गई। जांच के समय संजीव मुखिया फरार था। बाद में बिहार पुलिस ने उसे अन्य पेपर लीक मामलों में गिरफ्तार किया। चूंकि वह नीट-यूजी 2024 मामले की प्राथमिकी में भी नामजद था, इसलिए सीबीआइ ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की। जांच पूरी होने के बाद भी उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस आधार पर उसे आरोपपत्र में शामिल नहीं किया गया। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2024 में ही उसकी भूमिका को लेकर स्थिति साफ कर दी गई थी। इसलिए यह कहना गलत है कि बाद में जानबूझकर उसका नाम आरोपपत्र से हटाया गया।
अभी जेल में ही बंद रहेगा संजीव मुखिया
हालांकि, संजीव मुखिया को इस मामले में राहत मिलने के बावजूद उसकी कानूनी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। वह अब भी बिहार में दर्ज पांच अन्य पेपर लीक मामलों में आरोपित है। इनमें सिपाही भर्ती परीक्षा, शिक्षक भर्ती परीक्षा समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक के मामले शामिल हैं। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) इन मामलों में उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
पटना से खुला था पूरे नेटवर्क का राज
नीट-यूजी 2024 पेपरलीक मामले का पहला मुकदमा 5 मई 2024 को पटना के शास्त्री नगर थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने जांच शुरू की। पटना में छापेमारी के दौरान एक ब्वायज हॉस्टल और एक प्ले स्कूल से जले हुए प्रश्नपत्रों के अवशेष, उत्तर पुस्तिकाएं और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ था कि परीक्षा से एक दिन पहले, 4 मई को, कुछ अभ्यर्थियों को सुरक्षित ठिकानों पर बुलाकर प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए थे। इसी जांच के दौरान संजीव मुखिया सहित कई कथित साल्वर और बिचौलियों के नाम सामने आए थे। बाद में मामला देशव्यापी होने पर केंद्र सरकार ने जांच सीबीआइ को सौंप दी थी।
फैक्ट फाइल
- परीक्षा: नीट-यूजी 2024
- पहली प्राथमिकी: 5 मई 2024, शास्त्री नगर थाना, पटना
- जांच एजेंसी: पहले बिहार पुलिस की ईओयू, बाद में सीबीआइ
- आरोपपत्र: 45 आरोपितों के खिलाफ दाखिल
- संजीव मुखिया: साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपपत्र में शामिल नहीं
- स्थिति: अन्य पांच पेपर लीक मामलों में अब भी आरोपित, न्यायिक हिरासत में








