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15 लाख रुपये के लिए हुई थी वार्डन रिंकू की हत्या, दो आरोपी गिरफ्तार

  • हाईकोर्ट की सख्ती के बाद 15 दिनों में SIT ने सुलझाई गुत्थी
  • 2021 में कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन रिंकू कुमारी का मिला था शव
  • पहली जांच में आत्महत्या मान पुलिस ने लगा दी थी क्लोजर रिपोर्ट
  • बेटी की कानूनी लड़ाई के बाद हाई कोर्ट ने कराई दोबारा जांच
  • आइजी विकास वैभव की एसआइटी ने पुराने साक्ष्य खंगाले

बेगूसराय | चर्चित रिंकू कुमारी हत्याकांड की गुत्थी आखिरकार पांच साल बाद सुलझ गई। इस मामले में एसआइटी ने दो आरोपियों कौशल कुमार और अजीत कुमार उर्फ बबलू को गिरफ्तार किया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद करीब 15 दिन पहले दोबारा शुरू हुई जांच के बाद यह पहली बड़ी सफलता मानी जा रही है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। हालांकि शुरू से ही परिजन इसे हत्या बताते रहे। उनका आरोप था कि रिंकू की गला घोंटकर हत्या की गई और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने का प्रयास हुआ। परिजनों का यह भी कहना था कि उनकी शिकायत के अनुरूप जांच नहीं हुई और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजरअंदाज कर दिया गया।

4 अप्रैल 2021 को मिला था शव
रिंकू कुमारी वीरपुर प्रखंड के मुजफ्फरा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में वार्डन थीं। चार अप्रैल 2021 को उनका शव विद्यालय परिसर के एक कमरे में मिला था। उस समय पुलिस ने प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या का मामला माना था। बाद में अंतिम रिपोर्ट भी दाखिल कर दी गई थी।
बेटी ने हार नहीं मानी
तेजस्विनी ने एसआइटी को बताया कि मां रिंकू कुमारी ने घर बनाने के लिए जमीन का सौदा किया था। इसके एवज में असुरारी गांव के कौशल और रोहित को 15 लाख रुपये दिए थे। दोनों ने न जमीन दी और न ही पैसे लौटाए। गांव की पंचायत में 4 अप्रैल 2021 को पैसे लौटाने का वादा हुआ था। ठीक इसी दिन रिंकू की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। मामले में जिला कोर्ट ने न्याय नहीं मिलने पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट की सख्ती और एसआइटी का गठन
हाई कोर्ट ने पूरी जांच का रिकार्ड देखने के बाद कई गंभीर सवाल उठाए। अप्रैल महीने में न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने पुरानी पुलिस जांच में गंभीर खामियां पाई थीं। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और काल डिटेल को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था। कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया। इसके बाद आइजी विकास वैभव के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन हुआ। एसआइटी ने मोर्चा संभालते ही जांच तेज कर दी। जुलाई में एसआइटी सक्रिय हुई। टीम ने सबसे पहले पुराने केस डायरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्य और तकनीकी दस्तावेजों की समीक्षा की। इसके बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। विद्यालय के कर्मचारियों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों से फिर पूछताछ की गई। पुराने गवाहों के बयान दोबारा दर्ज किए गए। जिन बिंदुओं पर पहले जांच अधूरी रही थी, उन्हें नए सिरे से खंगाला गया।
सीसीटीवी से छेड़छाड़ और क्राइम सीन
एसआइटी ने इन्हीं पहलुओं पर काम शुरू किया। पुराने डिजिटल साक्ष्यों की दोबारा जांच की गई। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का मिलान किया गया। पूछताछ का दायरा बढ़ाया गया। पुलिस का मानना है कि हत्या वाले दिन एक बड़ी साजिश रची गई थी। रिंकू के स्कूल पहुंचने के बाद अचानक सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। दोपहर 1:30 बजे तक करीब डेढ़ घंटे कुछ भी रिकार्ड नहीं हुआ। इसी दौरान वार्डन की गला घोंटकर हत्या की गई। फिर शव को फंदे से लटका दिया गया। एसआइटी ने स्कूल पहुंचकर 5 साल बाद क्राइम सीन को रीक्रिएट किया। इसी दौरान जांच टीम को नए सुराग मिलने के साथ ही एक चश्मदीद गवाह भी मिला। इसके बाद वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कसा गया।
रिंकू हत्याकांड : पूरी टाइमलाइन
  • 4 अप्रैल 2021 : कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, मुजफ्फरा में वार्डन रिंकू कुमारी का शव मिला।
  • 5 अप्रैल 2021 : वीरपुर थाना में हत्या का मामला दर्ज। आत्महत्या की आशंका पर जांच शुरू।
  • 2021-22 : परिजन लगातार हत्या का आरोप लगाते रहे।
  • 2022 : बेटी तेजस्विनी कुमारी ने हाईकोर्ट में पुनः जांच की मांग की।
  • 2025 : विरोध याचिका खारिज होने के बाद मामला हाईकोर्ट में जारी रहा।
  • 8 अप्रैल 2026 : पटना हाई कोर्ट ने पुनः जांच के आदेश दिए। आइजी विकास वैभव को जांच की जिम्मेदारी।
  • 13 जुलाई 2026 : एसआइटी ने बेगूसराय पहुंच केस की समीक्षा की और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
  • पिछले 15 दिन : वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्यों की दोबारा जांच, गवाहों से पूछताछ, रिकार्ड का विश्लेषण।
  • 29 जुलाई 2026 : एसआइटी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।

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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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