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ओवर कांफिडेंस में बांकीपुर सीट हारी भाजपा


बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत को लेकर भाजपा ओवर कांफिडेंस थी जिस कारण उसकी नैया डूब गई। ओवर कांफिडेंस का ही कमाल था कि जब जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर यह ठिकरा फोड़ रहे थे कि भाजपा का कहना है कि अगर कुत्ता-बिल्ली को भी सिंबल देंगे तो वह चुनाव जीत जाएगा, तो भाजपा के किसी बड़े नेता ने इसका खंडन नहीं किया। फिर क्या था मतदाताओं को लगा कि प्रशांत किशोर जो कह रहे हैं वह सौ फीसदी सच है। कई नेता ऐसे शब्द बोल भी जाते हैं तो पार्टी का शीर्ष नेतृत्व कहता है कि वह उनका निजी बयान है। पार्टी का यह आधिकारिक बयान नहीं है। कुल मिलाकर ओवर कांफिडेंस में उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने क्यों दिया कुत्ता-बिल्ली वाला बयान
रविशंकर प्रसाद के कुत्ता-बिल्ली वाले का निहितार्थ अब चुनाव हारने के बाद तलाशा जाएगा। माना जा रहा है कि ऐसे वरिष्ठ नेता की जुबान नहीं फिसल सकती। कहीं केंद्र में मंत्री पद से बेदखल करना और स्वजातीय कम उम्र व कम तजुर्बा वाले नीतीन नवीन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर ताजपोशी उन्हें रास न आया हो। सवाल अब पार्टी के अंदर उठ सकते हैं। स्वयं नीतीन नवीन भी अपनी इज्जत बचाने के लिए रविशंकर प्रसाद के सिर ठिकरा फोड़ सकते हैं।
सीएम पद क्या मिला समझने लगे सम्राट
जीत को लेकर भाजपा इतना ओवर कांफिडेंट थी कि सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं का एक प्रेस कांफ्रेंस कर मैसेज देने का प्रयास भी नहीं किया गया। उसे लगा कि सीट बांकीपुर की है। भाजपा का गढ़ है। नीतीन नवीन यहां से जीतकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं। इससे बांकीपुर की प्रतिष्ठा बढ़ी है। ऐसे में जीत तय है। उसे यह पता नहीं था कि सम्राट चौधरी भले मुख्यमंत्री बन गए हों, लेकिन वह अभी नीतीश कुमार की तरह मास लीडर नहीं बन पाए हैं। गद्दी मिलने और मास लीडर बनने का फर्क उसे समझ में नहीं आ रहा था।
नीतीश को किनारे करना पड़ा मंहगा
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का वीडियो जारी करने के बजाय नीतीश कुमार, लोजपा सुप्रीमो व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, हम के सुप्रीमो जीतन राम मांझी, रालोसपा के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी या मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस होता तो बात कुछ और होती। भाजपा नेताओं को अब लग रहा होगा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के रोड शो में एनडीए के घटक दलों के शीर्ष नेताओं को क्यों नहीं शामिल कराया। नीतीश कुमार को जबरन मुख्यमंत्री पद से हटाने का मुद्दा जब विरोधी उछाल रहे थे तो उस हवा को खुद नीतीश कुमार ने शांत कराया था। हालांकि लोग मान रहे थे कि नीतीश को पद छोड़ने के लिए बाध्य किया गया है। वे किसी दबाव में राज्यसभा जाने का बयान दे रहे हैं। इधर, उपचुनाव में नीतीश कुमार को प्रचार में शामिल नहीं देख समर्थकों को लगा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को किनारे लगाया जा रहा है। ऐसे में नीतीश समर्थक भी अंदरखाने नाराज चल रहे थे। अगर भाजपा नेता इसे भी नहीं भांप सके तो स्वाभाविक है कि जनता की नब्ज पकड़ने में उसे अभी काफी समय लगेगा।
प्रत्याशी बदलना भी पड़ा मंहगा
प्रशांत किशोर तो मंच से कुत्ता-बिल्ली वाले बयान को हवा दे रहे थे। वहीं जन सुराज के कार्यकर्ता बंटी व नीरज कुमार सिन्हा एक को कुत्ता व दूसरे को बिल्ली बिल्ली बता रहे थे। वहीं भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक और आरके सिन्हा के पुत्र ऋषि सिन्हा में से किसी एक को टिकट नहीं देने से लोग नाराज चल रहे थे। उन्हें जमीनी कार्यकर्ता को टिकट देने की बात गले के नीचे नहीं उतर रही थी। यही कारण है कि भाजपा हरेक राउंड की गिनती में पीछे नजर आयी।
प्रशांत किशोर का आक्रामक मोड
दूसरी तरफ प्रशांत किशोर चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तिथि की घोषणा के साथ ही आक्रमक मोड में आ गए थे। चुनाव के आखिरी समय में अपने प्रमुख 16 नेताओं की धड़-पकड़ को लेकर जिस तरह वे हमलावर हुए उससे समर्थकों का हौसला बुलंद हुआ। जानकर बताते हैं कि प्रशांत किशोर की रणनीति ऐसी थी कि उन्होंने समर्थकों को मतदान केंद्र पर एक जगह अधिक संख्या में जमा भी होने नहीं दिया। इस तरह उन्होंने भाजपा को इस गफलत में रखा कि मानों जन सुराज रेस में है ही नहीं।
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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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