- अगस्त क्रांति दिवस पर ईसीआरईयू का जन कन्वेंशन
- नई श्रम संहिताओं और एनपीएस-यूपीएस का भी विरोध
समस्तीपुर | अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर रविवार को रेलवे कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। पूर्व मध्य रेल के मान्यता प्राप्त संगठन ईस्ट सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज यूनियन (ईसीआरईयू) के बैनर तले मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय के समक्ष विशाल जन कन्वेंशन आयोजित किया गया। कन्वेंशन में नई श्रम संहिताओं, रेलवे के निजीकरण और निगमीकरण का विरोध किया गया। कर्मचारियों ने एनपीएस और यूपीएस की व्यवस्था खत्म करने की मांग की। बोनस पर सीलिंग हटाने की भी मांग उठी। विभिन्न विभागों में आठ घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू नहीं होने पर भी नाराजगी जताई गई। बड़ी संख्या में रेलकर्मियों ने कन्वेंशन में भाग लिया। इस दौरान केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश पासवान ने की। संचालन मंडल सचिव संजीव मिश्रा ने किया।
निजी हाथों में सौंपने की कोशिश का विरोध
यूनियन के केंद्रीय संयुक्त महासचिव सह इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय सह महासचिव रत्नेश वर्मा मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने कहा कि नई श्रम नीति, निजीकरण, निगमीकरण, एनपीएस-यूपीएस और बोनस सीलिंग जैसे मुद्दों पर सरकार का रवैया कर्मचारी हित में नहीं है। रेलवे को टुकड़ों में बांटकर निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है। कर्मचारी इसका संगठित विरोध करेंगे।

लेबर कोड वापस लेने की मांग
मंडल सचिव संजीव मिश्रा ने कहा कि पेंशन, वेतन, भत्ता, बोनस, प्रमोशन, अनुकंपा नियुक्ति, ड्यूटी रोस्टर और विश्राम कर्मचारियों का अधिकार है। इन सुविधाओं को रेलवे प्रशासन को स्वत: लागू करना चाहिए। मंडल कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश पासवान ने लेबर कोड वापस लेने की मांग की। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और निजीकरण-निगमीकरण पर रोक लगाने के लिए निर्णायक आंदोलन का आह्वान किया। केंद्रीय संगठन सचिव चंदन यादव ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों पर निजीकरण और निगमीकरण थोपा जा रहा है। 55/30 सर्विस रिव्यू जैसी नीतियों से कर्मचारियों में असुरक्षा बढ़ रही है। उन्होंने देशभर के सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की।
ठेका मजदूरों के मुद्दे भी उठे
एआईसीसीटीयू नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि देश में मजदूरों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। ठेका मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही है। चार लेबर कोड के जरिए श्रमिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
रिक्त पद भरने और आठ घंटे की ड्यूटी की मांग
कन्वेंशन में रेलवे के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की मांग की गई। आउटसोर्सिंग खत्म करने और समान काम के लिए समान वेतन देने की मांग उठी। सभी विभागों में आठ घंटे का ड्यूटी रोस्टर लागू करने पर जोर दिया गया। रेलवे में रन-ओवर दुर्घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की गई। कर्मचारियों को जीवन रक्षक यंत्र उपलब्ध कराने की मांग उठी। रेलवे अस्पतालों और आवासीय सुविधाओं के विस्तार की मांग भी की गई। ट्रांसफर नीति में पारदर्शिता और विभिन्न भत्तों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।
कन्वेंशन को इन लोगों ने किया संबोधित
कन्वेंशन को राजकुमार, प्रेम कुमार ठाकुर, संतोष मिश्रा, प्रमोद कुमार राय, सोनू कुमार, वीरेंद्र कुमार, दीलीप कुमार, रत्न मिश्र, राजीव कुमार, अविनाश कुमार, चंदन कुमार, संतोष मिश्र, कैलाश कुमार, संगम कुमार, राज कुमार, ऐक्टू के ललन कुमार, रेल विकास मंच के राम विनोद पासवान, विश्वनाथ सिंह हजारी, सुशील कुमार, रामलाल राम, पूर्व पार्षद अर्जुन कुमार, दीनबंधु प्रसाद, शाहीद हुसैन और दीपक यदुवंशी सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। कन्वेंशन के अंत में रेलकर्मियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।










