- 4 लेबर कोड और कृषि नीतियों के खिलाफ समाहरणालय पर प्रदर्शन, कई हिरासत में
- साम्राज्यवाद विरोधी दिवस की स्मृति में संयुक्त किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियनों का राष्ट्रव्यापी आह्वान
- लोहिया नगर से समाहरणालय तक निकला विशाल जुलूस, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को किया डिटेन
- ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी, एमएसपी गारंटी कानून और स्मार्ट मीटर वापस लेने समेत कई मांगों पर हुंकार
बेगूसराय | साम्राज्यवाद विरोधी दिवस (“अंग्रेजों भारत छोड़ो” आंदोलन) की स्मृति में संयुक्त किसान मोर्चा, केंद्रीय मजदूर संगठनों एवं खेतिहर मजदूर यूनियनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बेगूसराय में विशाल ‘जेल भरो’ आंदोलन आयोजित किया गया। बिहार राज्य किसान सभा, सी.आइ.टी.यू. (CITU) और बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन की जिला इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में जिले भर से आए हजारों किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाएं शामिल हुईं।
बिहार राज्य किसान सभा के बेगूसराय जिला सचिव दयानिधि चौधरी ने बताया कि हाथों में झंडे और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों का जत्था लोहिया नगर पूर्वी रेलवे गुमटी से रवाना हुआ। प्रदर्शनकारी केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाते हुए समाहरणालय के उत्तरी द्वार पर पहुंचे और वहां जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन ने सभी प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया और नगर थाना ले गई। हालांकि, कुछ देर डिटेन करने के बाद सभी को रिहा कर दिया गया।

ये थीं मुख्य मांगें
- श्रम और कृषि नीतियां : मजदूर विरोधी 4 लेबर कोड रद किए जाएं। प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता वापस लिया जाए और बीज विधेयक 2025 रद हो।
- एमएसपी गारंटी कानून : किसानों की फसल के लिए C2+50% फॉर्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का कानूनी अधिकार मिले।
- निजीकरण पर रोक : बिजली का निजीकरण, स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना, और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण तुरंत बंद किया जाए।
- मजदूरी व कर्ज माफी : मजदूरों का न्यूनतम मासिक वेतन ₹26,000 तथा दैनिक मजदूरी ₹700 तय की जाए। किसानों और गरीबों के सभी कर्जे माफ किए जाएं।
- जमीन और मुआवजा : फोर-लेन, सिक्स-लेन और सेटेलाइट टाउनशिप के नाम पर उपजाऊ जमीन का जबरन अधिग्रहण बंद हो। भूमिहीनों को वास-आवास की जमीन और पर्चा धारियों को जमीन पर दखल मिले।
- स्कीम वर्कर : आंगनबाड़ी, आशा कर्मी और अन्य स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
स्थानीय व सामाजिक मुद्दे
- बरौनी रिफाइनरी, थर्मल और पेप्सी उद्योग के ठेका मजदूरों का शोषण बंद हो।
- खाद की किल्लत, कालाबाजारी और खाद खरीद में किसान आईडी की बाध्यता समाप्त हो।
- राशन कार्ड से नाम काटने, वृद्धावस्था पेंशन में आ रही रुकावटों और जमाबंदी सुधार में जारी भ्रष्टाचार पर लगाम लगे।
- महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अपराधों पर रोक लगे।
- समय रहते बाढ़ से निपटने के समुचित इंतजाम किए जाएं।
इन नेताओं ने किया नेतृत्व
प्रदर्शन का नेतृत्व बिहार राज्य किसान सभा के पूर्व राज्य अध्यक्ष व बेगूसराय के पूर्व विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह, कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शशिकांत राय, माकपा जिला सचिव रत्नेश झा, और सीआइटीयू जिला अध्यक्ष आर.एस. राय ने किया। इनके अलावा जिला पार्षद अंजनी कुमार सिंह, किसान काउंसिल के जिला अध्यक्ष सुरेश यादव, सचिव दयानिधि चौधरी, संयुक्त सचिव रामाशीष राय, खेतिहर मजदूर यूनियन के सचिव रामभजन सिंह, एसएफआइ राज्य सचिव देवदत्त कुमार वर्मा और डीवाईएफआइ जिला सचिव अजय कुमार यादव समेत कई प्रमुख नेता जुलूस में शामिल रहे।










