महागठबंधन के मुस्लिम-यादव की मजबूत किला बंदी वाले साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र में NDA किसी ऐसे अभिमन्यु की तलाश में है, जो MY समीकरण को भेद सके। राजद इसी समीकरण के सहारे यहां से चुनाव जीतती रही है। 1977 के बाद अधिकांश विधानसभा चुनाव में राजद यहां से चुनाव जीतती रही है। हालांकि JDU ने दो बार अल्पसंख्यक प्रत्याशी को मैदान में उतार कर राजद को मात दी है, लेकिन जब उसने अतिपिछड़ा का कार्ड खेला तो उसे सफलता नहीं मिली।
जदयू ने MY समीकरण में सेंधमारी की रणनीति के तहत 2005 जमशेद असरफ व 2010 में प्रवीण अमानुल्लाह को मैदान में उतारा था और दोनों ही बार चुनाव जीत गई। दोनों ने कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री श्रीनारायण यादव को हराया था। अभी श्रीनारायण यादव के पुत्र सतानंद संबुद्ध (राजद)यहां से विधायक हैं। राजद के कद्दावर नेता को हराकर जीतने वाले दोनों नेताओं को मंत्री भी बनाया गया था। इससे पूर्व कांग्रेस के समसू जोहा ने भी 1985 में (तब बलिया विधानसभा) श्रीनारायण यादव को हराया था।


MY समीकरण के बीच भी सुरेन्द्र विवेक की पैठ
2019 के लोकसभा चुनाव में NDA के प्रत्याशी गिरिराज सिंह ने साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र से 75,324 मत लाकर राजद के डॉ. तनवीर हसन से 35,466 मत और 2024 में 74,943 मत हासिल कर महागठबंधन प्रत्याशी अवधेश राय से 1443 मतों से बढ़त बनाई थी। दोनों साल इस बढ़त में सुरेन्द्र विवेक का बड़ा योगदान माना जाता है। गिरिराज सिंह व सुरेंद्र विवेक दोनों ही भूमिहार जाति से आते हैं। यह बात और है कि चुनाव के समय क्षेत्र में गिरिराज सिंह को हिन्दू सम्राट के रूप में पेश किया जाता है और वे मुस्लिम मतदाताओं के यहां वोट भी मांगने नहीं जाते हैं। इस कारण वोट की गोलबंदी हिन्दू-मुस्लिम के आधार पर इस क्षेत्र में हो जाती है। दरअसल, इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा आबादी यादव की है। दूसरे नंबर पर मुस्लिम व तीसरे स्थान पर धानुक-कुर्मी। हालांकि यहां पचकोनिया वोट की भी कमी नहीं है। इतना तय है कि यहां NDA व महागठबंधन आमने-सामने होंगे। इस कारण सबकी नजर NDA का प्रत्याशी कौन होगा, इस पर टिकी है।
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