- स्पिक मैके की ओर से संतूर वादन का आयोजन
- संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित तरुण भट्टाचार्य ने दी प्रस्तुति
बेगूसराय | पन्हास स्थित भारद्वाज गुरुकुल में शुक्रवार को शास्त्रीय संगीत के सुर तैर रहे थे। यहां संतूर और तबले की बीच की जुगलबंदी ऐसी थी मानों दोनों वाद्य यंत्रों में बातचीत हो रही हो। दोनों साज एक-दूसरे से सवाल-जवाब कर रहे थे। स्पिक मैके की ओर से आयोजित इस डेढ़ घंटे के कार्यक्रम में मैहर घराने के संगीतकार और संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित पंडित तरुण भट्टाचार्य राग परमेश्वरी से संतूर के तार को छेड़ रहे थे तो उनके साथ तबले पर पंडित ज्योतिर्मय राय चौधरी संगत कर रहे थे। श्रोताओं में बैठे छात्र और संगीत प्रेमी पंडित तरुण भट्टाचार्य की तंत्रकारी पर चकित थे।

स्पिक मैके के जिला समन्वयक शिव प्रकाश भारद्वाज ने बताया कि इससे पहले सुबह 10 बजे से 11.30 बजे तक पंडित तरुण भट्टाचार्य ने मध्य विद्यालय चेरिया बरियारपुर में प्रस्तुति दी। कार्यक्रम समापन उपरांत कत्थक नृत्य के उस्ताद सुदामा गोस्वामी, जीडी कॉलेज के वर्सर डॉ. एसके पांडेय आदि ने पंडित तरुण भट्टाचार्य को अंगवस्त्र और पुस्तक देकर सम्मानित किया।
हर कोई संगीतकार नहीं हो सकता, लेकिन हर किसी को म्यूजिकल हाेना जरूरी
युवाओं का रुझान शास्त्रीय संगीत की ओर कम है, के सवाल पर पंडित तरुण भट्टाचार्य ने कहा कि शास्त्रीय संगीत को सुनने से आत्मा को तृप्ति मिलेगी और मन की निराशा दूर होगी। युवाओं को क्लासिकल म्यूजिक से जुड़ना चाहिए। क्लासिकल म्यूजिक बच्चों को एकाग्रचित्त करने में बड़ी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि हर कोई संगीतकार नहीं हो सकता, लेकिन हर किसी को म्यूजिकल होना जरूरी है।

संतूर के तारों का संयोजन करना कठिन
उन्होंने कहा कि संतूर वादन को अब तक उतनी प्रसिद्धि नहीं मिल सकी है जितनी हारमोनियम, गिटार और तबला वादन को मिली है। इसके पीछे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि संतूर बजाना कठिन है। इसमें करीब 100 तार होते हैं और इनका संयाेजन कर पाना मुश्किल है। हालांकि बच्चे ठीक से अभ्यास करें तो एक-दो साल में वे बढ़िया संतूर बजा सकते हैं।










