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विशेष अवकाश में गईं शिक्षिकाएं, कई विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित

  • ज्ञान भारती प्लस टू विद्यालय में एक साथ 28 शिक्षिकाएं विशेष अवकाश पर
  • कई शिक्षिकाओं ने 23-24 जून या 24-25 जून को विशेष अवकाश लिया

बेगूसराय | जिले के कई सरकारी विद्यालयों में इन दिनों महिला शिक्षिकाओं के विशेष अवकाश पर जाने से पठन-पाठन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कुछ विद्यालयों में स्थिति ऐसी है कि एक भी महिला शिक्षिका उपस्थित नहीं है। इससे अभिभावकों और छात्रों के बीच विद्यालय संचालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, जून माह में पहले से ही ग्रीष्मावकाश घोषित था और विद्यालय 22 जून से खुले हैं। इसके बाद 26 जून और 29 जून को सरकारी अवकाश तथा 28 जून को रविवार होने के कारण कई शिक्षिकाओं ने 23-24 जून या 24-25 जून को विशेष अवकाश ले लिया। इससे लगातार कई दिनों तक विद्यालयों में महिला शिक्षकों की उपस्थिति काफी कम हो गई।

हर जिले में यही स्थिति
सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति किसी एक विद्यालय तक सीमित नहीं है। जिले के अनेक विद्यालयों में एक साथ बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाएं विशेष अवकाश पर चली गई हैं। बताया जाता है कि ज्ञान भारती प्लस टू विद्यालय में एक समय में 28 शिक्षिकाएं विशेष अवकाश पर रहीं। कई अन्य विद्यालयों में भी लगभग यही स्थिति है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि अवकाश लेना शिक्षिकाओं का वैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके कारण यदि कक्षाएं प्रभावित होती हैं तो सबसे अधिक नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता है। सवाल यह है कि जब एक साथ बड़ी संख्या में शिक्षक अवकाश पर हों, तब विद्यालय में नियमित पठन-पाठन कैसे सुनिश्चित होगा।
SL लेने की मारामारी क्यों
यह अवकाश हर माह लैप्स हो जाता है यानी माह खत्म तो अवकाश खत्म। किसी माह अगर दो दिन का scl नहीं लिए तो ये अगले माह में नहीं जुड़ेगा। इसलिए भी इसके उपभोग का दबाव ग्रीष्मावकाश या फिर छठ दीपावली या फिर किसी अन्य अवकाश के समय बढ़ जाता है। क्योंकि माह में बचे हुए दिनों की संख्या कम हो और सेवा में महिलाएं ज्यादा हों तो उनमें फिर अपनी विशेष आकस्मिक छुट्टियों को कालातीत /लैप्स नहीं होने देने की बलवती इच्छा अवकाश पर महिला सेवकों को संगठित होकर अवकाशपर जाने को विवश करती हैं।
पढ़िए, क्या कहते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार ने कहा, “महिला शिक्षकों को विशेष अवकाश लेने का अधिकार प्राप्त है और वे नियमानुसार इसका उपयोग कर सकती हैं, लेकिन विद्यालय का संचालन सुचारु रहे और पढ़ाई प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखना भी आवश्यक है। यह दायित्व संबंधित विद्यालय प्रधान का है कि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित न होने दें।”
अब जानिए, SL को लेकर सरकार का नियम

बिहार सरकार के नियमों के अनुसार, राज्य की सभी नियमित महिला कर्मचारियों और शिक्षिकाओं (BPSC से नियुक्त अध्यापिकाओं सहित) को प्रतिमाह 2 दिनों का विशेष आकस्मिक अवकाश (SCL) मिलता है। यह नियम बिहार सेवा संहिता के परिशिष्ट 13 के नियम 2(ख) और वित्त विभाग के पत्र (04-04-1992) के तहत लागू है।

  1. अतिरिक्त छुट्टी: यह 2 दिनों का विशेष अवकाश, साल में मिलने वाले सामान्य 16 आकस्मिक अवकाशों (CL) के अतिरिक्त होता है।
  2. एक साथ उपभोग: यह अवकाश प्रत्येक माह में एक बार, लगातार दो दिनों के लिए ही देय होता है।
  3. क्लब करने का नियम (अधिकतम 12 दिन): इस विशेष अवकाश को रविवार, अन्य सार्वजनिक अवकाशों या सामान्य आकस्मिक अवकाश (CL) के साथ आगे-पीछे जोड़कर लिया जा सकता है। हालांकि, सबको मिलाकर लगातार अनुपस्थिति की अवधि 12 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  4. आयु की कोई सीमा नहीं: अक्सर यह भ्रम रहता है कि 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिला शिक्षिकाओं को यह अवकाश नहीं मिलेगा, जो कि पूरी तरह गलत है। इस नियम के तहत उम्र की कोई सीमा तय नहीं है, केवल सरकारी सेवक का महिला होना अनिवार्य है।
अवकाश का चक्रव्यूह और SCL का ब्रह्मास्त्र

एक रोचक तथ्य यह भी है कि सामान्य दिनों में भी किसी कार्यालय में कार्यरत 90 प्रतिशत महिला रविवार अथवा अन्य 3 से सात दिनों की छुट्टियों से जोड़कर ही scl लेना चाहती हैं। जैसे मान लीजिए कि 6 मार्च दिन गुरुवार से लेकर शनिवार होली फिर 9 मार्च को रविवार की छुट्टी है, अगले सप्ताह में फिर 12 मार्च बुधवार को शब-ए-बरात की छुट्टी है तो मेरे विद्यालय में कार्यरत महिलाएं 98 प्रतिशत पूरे माह के अन्य दिनों में scl का उपयोग नहीं करेंगी और सबका दबाव होली से पहले यानी 28/29 फरवरी शनिवार को स्कूल में ड्यूटी करके आवेदन देगी। 1 मार्च रविवार के बाद सोमवार मंगलवार scl बुधवार को 4 मार्च cl फिर होली फिर रविवार मतलब 1 cl में पूरे हफ्ते भर की छुट्टी। दो से तीन का अगर इस अनुसार ग्रांट कर दिए। बाकी का रिजेक्ट तो ये दबाव अगले शिफ्ट में चेंज हो जाता है; अर्थात होली के बाद वाले मंडे यानी 10 और 11 मार्च को scl फिर 12 मार्च को शब-ए-बारात और इस तरह मात्र 2 scl में 6 दिन के अवकाश का आनंद, लेकिन बहुत कम महिला होती है जो सिर्फ दो दिन के scl का उपभोग करती है।

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विजय झा

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