नई दिल्ली/एजेंसी | मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) में हुई व्यापक अनियमितताओं और पेपर लीक मामले ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्रों के उग्र प्रदर्शन का अंततः बड़ा असर हुआ है। लगातार बढ़ते दबाव और विपक्ष के हमलों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है। इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे के साथ ही सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है।
झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए : अभिजीत दीपके
इधर, प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर से हुंकार भरते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा, “लोग कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। मुझे एक महीने से लोग ताने मार रहे थे कि क्या कर रहे हो, कब तक बैठोगे, ये मनमानी सरकार है, ये इस्तीफा नहीं देंगे। मगर हमने कर दिखाया। झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”
‘यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं, देश की एकता सर्वोपरि’
इस्तीफे के तुरंत बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक विस्तृत और भावुक पोस्ट लिखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला उन्होंने देशहित और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया है। प्रधान ने अपने पोस्ट में लिखा, “पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन अत्यंत दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। जंतर-मंतर पर और देश भर में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं और देश की एकता बनी रहे, इसीलिए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।” उन्होंने आगे कहा कि उनका उद्देश्य यही है कि भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे। बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं और करियर बनाने पर फोकस करें। उन्होंने अपने चार दशक के राजनीतिक और सामाजिक जीवन का हवाला देते हुए कहा कि वे हमेशा शिक्षा सुधार और युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए समर्पित रहे हैं।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
नीट धांधली पर दी सफाई, अगले साल से CBT मोड में होगी परीक्षा
अपने इस्तीफे वाले बयान में धर्मेंद्र प्रधान ने नीट परीक्षा को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी बचाव किया। उन्होंने बताया कि 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितता सामने आते ही सरकार ने तुरंत जांच CBI को सौंपी। परीक्षा रद करके 21 जून 2026 को 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए पुनः परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित कराई गई। अगले वर्ष से इस परीक्षा को पूरी तरह से सीबीटी (Computer-based-test) मोड में कराने का कड़ा निर्णय लिया गया है, ताकि पेपर लीक की गुंजाइश न रहे। 16 जुलाई 2026 को घोषित परिणामों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नतीजे संतोषजनक रहे और गरीब पृष्ठभूमि के कई छात्रों को सफलता मिली। लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे वे व्यथित हैं।
NTA पर गिरी गाज, 47 अधिकारी एक साथ बर्खास्त
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से ठीक पहले सरकार ने व्यवस्था की सफाई के लिए कड़े कदम उठाए। शुक्रवार रात पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को एक झटके में बर्खास्त कर दिया गया। इन सभी के खिलाफ क्रिमिनल केस भी दर्ज किए जा रहे हैं। इससे एक दिन पहले, गुरुवार को ही शिक्षा मंत्रालय के दो शीर्ष सचिवों को भी उनके पद से हटा दिया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, NTA में सुधार के लिए जल्द ही एक नई रूपरेखा पेश की जाएगी।
CJP का ऐलान- ‘इस्तीफा हो गया, लेकिन कॉकरोच निकलता नहीं है’
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे छात्रों ने अपनी पहली बड़ी जीत बताया है। हालांकि, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। दिल्ली पुलिस और सरकार को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, “मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो मांगें अभी भी बाकी हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है। दिल्ली पुलिस के अधिकारी याद रखें कि उन्होंने कॉकरोच से पंगा लिया है। हमने तो एक मंत्री का इस्तीफा ले लिया, तो तुम लोग क्या चीज हो।”
- मुआवजा: नीट विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- केस वापसी और एक्शन: प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे तुरंत वापस हों और लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन लिया जाए।
विवाद की शुरुआत और घटनाक्रम
- 15 मई 2026 : सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान सीजेआई द्वारा कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की गई। इस टिप्पणी के बाद इंटरनेट पर छात्रों ने भारी आक्रोश व्यक्त किया।
- 16 मई 2026 : टिप्पणी पर तंज कसते हुए राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने एक्स (X) पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के गठन की घोषणा की। “आलसी और बेरोजगारों की आवाज़” टैगलाइन के साथ शुरू हुए इस अभियान ने कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स जुटा लिए।
- 11-14 जून 2026 : डिजिटल प्लेटफॉर्म से निकलकर यह आंदोलन पुणे, लखनऊ, अमृतसर, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में जमीनी स्तर पर शुरू हुआ।
- 15 जून 2026 : जयपुर के शहीद स्मारक पर रैली के दौरान अभिजीत दीपके पर हमला किया गया, लेकिन उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया और हजारों की भीड़ के बीच अपना प्रदर्शन जारी रखा।
- जून का अंतिम सप्ताह : प्रसिद्ध शिक्षाविद् और इनोवेटर सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़ गए। NEET पेपर लीक और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल (अनशन) शुरू कर दी। इस दौरान CJP के प्रमुख प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका भी आंदोलन का मुख्य चेहरा बने।
- 20 जुलाई 2026 : प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च निकाला। दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जंतर-मंतर से टेंट उखाड़ दिए। सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस बीच राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी नेताओं ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया। सीजेपी नेताओं ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत तीन प्रमुख मांगें रखीं।
- 24 जुलाई 2026 : सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त की। अभिजीत दीपके ने अपनी टीम की संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए समर्थकों से हर हाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने की अपील की।










