- 26 जुलाई 2026 तक दर्ज एफआइआर और नोटिस रद करने की प्रक्रिया शुरू
- 999 नामजद आरोपियों को मिली राहत
- आंदोलन के दौरान 91 पुलिसकर्मी और कई अधिकारी हुए थे घायल
पटना | नीट यूजी परीक्षा में कथित धांधली के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बिहार सरकार ने बड़ी राहत दी है। राज्य के गृह विभाग ने आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेने का ऐलान किया है। इसके साथ ही जेल में बंद लोगों की रिहाई की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी। बिहार सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब काकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले को वापस नहीं लेने पर चेतावनी दी थी। सरकार के इस फैसले का छात्र संगठनों ने स्वागत किया है।
गृह विभाग द्वारा सोमवार को जारी आदेश के अनुसार, 26 जुलाई 2026 की शाम छह बजे तक दर्ज सभी मामलों को वापस लिया जाएगा। इसके दायरे में आंदोलन से जुड़ी सभी प्राथमिकी (FIR), परिवाद और कारण बताओ नोटिस आएंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन में नामजद किए गए किसी भी व्यक्ति पर भविष्य में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। परीक्षा व्यवस्था और उच्च शिक्षा में सुधार की मांग को लेकर यह आंदोलन किया गया था।
355 गिरफ्तार लोगों की जल्द होगी रिहाई
पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे आंदोलन में 59 एफआइआर दर्ज की गई थीं। इनमें 999 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें से 339 छात्रों और नाबालिगों को सत्यापन के बाद छोड़ दिया गया था। वहीं, हिंसा के आरोप में 355 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसी प्रदर्शन में जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और लालू के बेटे तेज प्रताप यादव भी जेल में हैं। सरकार के नए फैसले से अब इन सभी की जल्द रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

सारण, सीवान समेत इन जिलों में मचा था उत्पात
छात्र संगठनों के इस आंदोलन ने कई जिलों में उग्र रूप ले लिया था। सबसे ज्यादा बवाल सारण, सीवान, सीतामढ़ी और पटना जिले में देखने को मिला। उपद्रवियों ने कानून-व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया था। प्रदर्शन के दौरान 14 सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई थी, जबकि एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया था।
91 पुलिसकर्मी और दो बीडीओ हुए थे घायल
आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प में 91 पुलिस पदाधिकारी और जवान घायल हुए थे। इनमें सीवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक (SP), दो एसडीपीओ और पटना के गांधी मैदान के थानाध्यक्ष शामिल थे। वहीं, सारण जिले में भीड़ ने दो प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) पर गंभीर हमला किया था। इस हमले में एक अधिकारी के सिर में गहरी चोट आई थी, जबकि दूसरे अधिकारी की आंख की रोशनी चली गई थी।
गृह विभाग की ओर से जारी पत्र











