- एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों दोषियों पर लगाया 90-90 हजार रुपये का जुर्माना
- मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच के दौरान सीबीआइ की छापेमारी में बरामद हुए थे हथियार
बेगूसराय | बहुचर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से जुड़े आर्म्स एक्ट (शस्त्र अधिनियम) के मामले में बेगूसराय की एमपी-एमएलए कोर्ट ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को दोषी करार देते हुए सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोनों पर 90-90 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में लेकर बेगूसराय मंडलकारा (जेल) भेज दिया गया। यह फैसला एडीजे-2 सह एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह ने चेरियाबरियारपुर थाना कांड से संबंधित मामले में सुनाया।
यह है पूरा मामला
वर्ष 2018 में मुजफ्फरपुर के खौफनाक बालिका गृह यौन शोषण कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जांच के दौरान मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर के साथ पूर्व मंत्री के पति चंद्रशेखर वर्मा के करीबी संबंधों का खुलासा हुआ था। इसी कड़ी में सीबीआइ ने 17 अगस्त 2018 को चेरियाबरियारपुर थाना क्षेत्र के अर्जुनपुर गांव स्थित मंजू वर्मा के पैतृक आवास पर छापेमारी की थी। इस दौरान एक बंद कमरे से थ्री-नॉट-थ्री (.303) राइफल और 50 से अधिक जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। इस खुलासे और बढ़ते दबाव के बाद मंजू वर्मा को नीतीश कुमार कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा था और दोनों पति-पत्नी को कई महीनों तक फरार रहने के बाद सरेंडर करना पड़ा था।
गवाहों और साक्ष्यों ने किया जुर्म साबित
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राम प्रकाश यादव और लोक अभियोजक संतोष कुमार ने पैरवी की। कोर्ट में सीबीआइ के डीएसपी उमेश कुमार सहित कुल सात गवाहों ने गवाही दी। छापेमारी दल के अधिकारियों ने भी अदालत में पेश होकर हथियारों की बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों की पुष्टि की। लंबी न्यायिक प्रक्रिया और ठोस सबूतों के आधार पर अदालत ने यह अहम फैसला सुनाया। फैसला सुनाए जाने के वक्त पूर्व मंत्री के पुत्र सह चेरियाबरियारपुर से जदयू विधायक अभिषेक कुमार भी अदालत परिसर में मौजूद थे।










