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स्कूलों ने फ्री सेनेटरी पैड नहीं दिए तो मान्यता रद्द

नई दिल्ली/एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महिलाओं के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस जेबी परदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने सभी राज्यों के स्कूलों के अंदर मुफ्त सेनेटरी पैड रखने के निर्देश दिए। साथ कहा कि अगर सरकारें कक्षा 6 से 12वीं तक की लड़कियों को टॉयलेट और मुफ्त सेनेटरी पैड देने में फेल होती हैं, तो उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।
… तो फिर स्कूलों की मान्यता रद्द होगी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कह कि अगर कोई निजी स्कूल लड़कियों के लिए अलग शौचालय और सेनेटरी पैड देने में सफल नहीं होते हैं तो उनकी मान्यता रद्द होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह फैसला उस क्लास के लिए है, जहां लड़कियां मदद मांगने में झिझकती हैं। यह उन शिक्षकों के लिए है जो मदद करना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण नहीं कर पाते।”

दिव्यांगों के लिए भी व्यवस्था 

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सभी स्कूलों में दिव्यांगों के लिए अनुकूल शौचालय उपलब्ध कराने के लिए कहा है। वहीं सभी राज्यों के स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग टॉयलेट सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

किस मामले के बाद ऐसा फैसला

यह फैसला पिछले साल नवंबर में शुरू हुई कार्यवाही के बाद आया है। तब कोर्ट ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में हुई एक शर्मनाक घटना पर स्वतः संज्ञान लिया था। आरोप था कि वहां तीन महिला सफाई कर्मचारियों को माहवारी में होने के सबूत के तौर पर अपने सैनिटरी पैड की तस्वीरें भेजने के लिए मजबूर किया गया था।

कोर्ट ने कहा कि मासिक स्वास्थ्य और स्वच्छता का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और निजता के अधिकार का हिस्सा है।

बेगूसराय: तीन सरकारी स्कूलों में है सेनेटरी पैड की व्यवस्था

बेगूसराय के तीन सरकारी स्कूलों में लड़कियों को सेनेटरी पैड देने की व्यवस्था है। हालांकि यह व्यवस्था सरकारी स्तर पर नहीं है। इन स्कूलों में यह व्यवस्था नोबा ( नेतरहाट विद्यालय पूर्ववर्ती छात्र संघ) ओर से की गई है।

1. राजकीयकृत मध्य विद्यालय बीहट की शिक्षिका अनुपमा सिंह ने बताया कि छठी से आठवीं तक 330 छात्राएं हैं और विद्यालय में 12 शिक्षिकाएं तैनात हैं। यहां 2020 और 2025 में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन लगाई गई है। ये मशीनें सेना में तैनात किशन जी, शिक्षिका अनुपमा सिंह और नोबा की ओर से दी गई हैं।

मध्य विद्यालय बीहट में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन के पास खड़ी छात्राएं।

2. राजकीयकृत मध्य विद्यालय मोहनपुर के प्रधानाध्यापक विनय कुमार ने बताया कि उनके विद्यालय विद्यालय में भी सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन लगी है। इसे भी नोबा ने लगवाया है। हालांकि पैड लेने के लिए छात्राओं को दो रुपए खर्च करने पड़ते हैं। शुरुआत में प्रधानाध्यापक खुद सेनेटरी पैड खरीदकर लाते थे और जरूरत पड़ने पर छात्राओं को बांटते थे। ऐसा करने से लड़कियों के स्कूल नहीं आने की संख्या में कभी आई।

उत्क्रमित मध्य विद्यालय पर्रा में वेंडिंग मशीन से सेनेटरी पैड लेती शिक्षिका।

3. इसी तरह उत्क्रमित मध्य विद्यालय पर्रा, वीरपुर में भी सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन लगी है। प्रधानाध्यापक मनोज कुमार झा ने बताया कि यहां भी मशीन नोबा की ओर से लगाई गई है। स्कूल में 6ठी से आठवीं तक 88 लड़कियां और 8 महिला शिक्षक हैं।

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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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