तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव में पांच नाटकों का हुआ मंचन
बीहट। मध्य विद्यालय बीहट के परिसर में आयोजित नाट्य महोत्सव का समापन बुधवार की रात दो नाटकों की प्रस्तुति के साथ किया गया। पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, कोलकाता व आकाश गंगा रंग चौपाल एसोसिएशन, बरौनी द्वारा आयोजित 3 दिवसीय नाट्य महोत्सव में नाट्य संस्था रिवाइवल बेगूसराय द्वारा फणीश्वर नाथ रेणु की मूल कहानी का कुमार अभिजीत द्वारा नाट्य रूपांतरण व निर्देशन करते हुए विपद ढोलकिया की प्रस्तुति की गयी। लोक कलाओं के संरक्षण, व्यवस्था परिवर्तन एवं हमारे सामाजिक सांस्कृतिक नैतिक मूल्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को रेखांकित करती नाटक समाज के उपर बड़ा छोड़ गया। नाटक विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को संभालने समझने एवं साहस के साथ कर्मठता से जीवन जीने का संदेश देती दिखी। आज के दौर में लोग जिस तरह आधुनिकता की तरफ भाग रहे हैं उससे हमारा पुरातन वैभव, संस्कृति, कला और कलाकार छूटते चले जा रहे हैं। उन्हें बस मंच और किताबों तक समेट कर रखने को लेकर विपद ढोलकिया के बहाने निर्देशक ने कई सवाल उठाए। नाटक पुरानी परंपराओं और कलाकारों के दर्द को उभारने की कोशिश में लगी रही। नाटक के निर्देशक व अभिनेता लुट्टन पहलवान की भूमिका में कुमार अभिजीत की ढोलक अंधेरे, महामारी और विपरीत समय में ग्रामीणों को जीने की प्रेरणा देती है किन्तु अंततः व्यवस्था के बदलते ही वह आप्रासंगिक होकर मिट जाती है। यह नाटक कलाकार के संरक्षण व संवर्धन की वकालत करती है क्योंकि आज भी लुट्टन सिंह जैसे हजारों लोक कलाकार व्यवस्था से हार कर भूख प्यास और परिवार के लिए कलाकारी और कला को छोड़कर मजदूर बनने को विवश हैं। लुट्टन की भूमिका में कुमार अभिजीत ने दर्शकों को रोमांचित किया। लुट्टन की पत्नी के रूप में रजनी कुमारी, लुट्टन के बेटे की भूमिका में अनिकेत सुलभ व मिहिर मानस ने दर्शकों की तालियां बटोरी राजा की भूमिका में मनीष कुमार, चांद सिंह की भूमिका में दीपक कुमार, मुंशी की भूमिका में नीरज कुमार, कवि की भूमिका में दीपक कुमार ने काफी प्रभावित किया। ढोलक पर नंदू कुमार, साउंड चंदन कुमार, लाइट मनोज कुमार, मेकअप-अमृता कुमारी का रहा।

कला भवन नाट्य विभाग पूर्णिया के कलाकारों ने किया पंचलाइट का मंचन
वहीं दूसरी प्रस्तुति कला भवन नाट्य विभाग पूर्णिया की पंचलाइट रही। नाटक का निर्देशन विश्वजीत कुमार सिंह ने किया। नाटक में पंचों की झूठी शान और अंधविश्वास को दर्शाते हुए यह दिखाया गया कि जरूरत पड़ने पर पुरानी परंपराएं व्यर्थ हो जाती हैं। बिहार के ग्रामीण परिवेश का यथार्थवादी चित्रण करना, जहां संपन्नता न होने पर भी लोग मिल-जुलकर पंचलाइट लाते हैं। साथ ही गोधन और मुनरी के प्रेम के माध्यम से ग्रामीण युवाओं की मासूमियत और मानवीय संवेदनाओं को भी उजागर किया गया। नाटक में प्रेम और मानवीयता के आगे जातिगत भेदभाव और पंचों की संकीर्ण मानसिकता टिक नहीं पाती। ग्रामीण जीवन में आशा और एकता का संदेश देती है। नाटक में
सूत्रधार सूचित कुमार, गुलरी मंजू देवी, सरपंच की भूमिका में सुमित सिंह, अजीत कुमार सिंह, दीवान अभिनव कुमार, बिलवा अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने अपने अभिनय से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं कल्लू शिवाजी राम राव, गोधन- प्रवीण कुमार, मुनरी -गरिमा सिंह, सरपंचनी -मिताली भौमिक, साक्षी झा, वैभव, चंदन कुमार सिंह, दक्ष, साहिल, संतोष, इरफान की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वहीं संगीत पर रामपुकर टूटू, कुंदन सिंह थे।

समापन समारोह को तेघरा विधायक ने किया संबोधित
इसके पूर्व नाट्य महोत्सव के समापन समारोह का उदघाटन तेघरा विधायक रजनीश कुमार, पूर्व विधान पार्षद भूमिपाल, बरौनी बीडीओ अनुरंजन कुमार, नगर परिषद बीहट के कार्यपालक पदाधिकारी अवनीश कुमार, एनटीपीसी के मानव संसाधन प्रबंधक के.एन. मिश्रा, उपमुख्य पार्षद ऋषिकेश कुमार, सचिव गणेश कुमार द्वारा किया गया। मौके पर तेघड़ा विधायक रजनीश कुमार ने कहा कि बीहट सांस्कृतिक राजधानी है। यहां धरती राजनीति, शिक्षा, संस्कृति और खेल से परिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह हम सबकी यह जिम्मेदारी है कि जिस काम को आकाश गंगा रंग चौपाल के कलाकार कर रहे हैं, उन्हें हम अपना संरक्षण दें।

संगठन के सदस्यों ने अतिथियों का किया स्वागत
इसके पूर्व आगत अतिथियों का स्वागत अध्यक्ष डॉ कुन्दन कुमार, सचिव गणेश गौरव, उपाध्यक्ष दिनेश दीवाना, मनीष कुमार, अंकित कुमार, शिव कुमार, राधे कुमार, महेश कुमार, शिवम कुमार द्वारा किया गया। वहीं इस अवसर पर कलाकार आनंद कुमार, राजू, संतोष, साक्षी, अंजली, निधि, कविता, निखिल, रुही, अनिमेष द्वारा गीत व नृत्य की प्रस्तुति की गयी।









