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मेरी प्रतिभा के निखार में जटा बाबू का बड़ा योगदान: पद्मश्री शांति देवी

  • मधुबनी के सरहद में मनाई गई जटाशंकर दास की 103वीं जयंती

मधुबनी| सिद्धहस्त कलाकार पद्मश्री शांति देवी ने कहा कि मैं आज जहां खड़ी हूं उसमें जटा बाबू का बड़ा योगदान है। वह 3 मार्च को लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान द्वारा जिले के सरहद गांव में आयोजित स्वतंत्रता सेनानी जटाशंकर दास की 103 वीं स्मृति समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।

अपने उद्बोधन के दौरान भावुक पद्मश्री शांति देवी ने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जब वह महज 17-18 वर्ष की थीं तो गोद में बच्चा लेकर स्टीमर से सन 76-77 में पटना उद्योग विभाग पहुंचीं थीं। साथ में मात्र एक पेंटिंग थी। डरी-सहमी कला संस्कृति विभाग के अधिकारी उपेन्द्र महारथी से मिली तो उन्होंने कहा कि बड़ा साहेब आपके क्षेत्र के हैं। फिर जटा बाबू से मिली। उन्होंने हौसला बढ़ाया और अपनी बेटी की तरह स्नेह दिया। आज जटाशंकर बाबू के जन्म स्थान का दर्शन कर गदगद हो गई। उन्होंने कहा कि मिथिला पेंटिंग आज देश-विदेश में देखते हैं, जानते हैं तो उसका श्रेय जटाशंकर दास को जाता है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मुखिया डॉ. इंद्रमोहन झा ने कहा कि जटा बाबू पटना में भले अधिकारी थे, लेकिन गांव में सरहद के पुत्र के रूप में भूमिका निभाते थे। यही कारण है कि मेरे जैसे साधारण लोगों पर भी वे अपना स्नेह बरसाते थे। वहीं किसान-मजदूर नेता अधनू यादव ने भी उनके साथ बीताए अपने अनुभव का उल्लेख अपने संबोधन में किया। समारोह को संबोधित करने वालों में प्रफुल्लचंद्र झा, पुण्यानंद झा, सेवानिवृत्त शिक्षक अशोक कुमार पांडे, कन्हैया सिंह के साथ ही अवकाशप्राप्त प्राचार्य व कवि शुभ कुमार वर्णवाल शामिल हैं। मंच संचालन लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान के सचिव प्रो. महेन्द्र लाल कर्ण और धन्यवाद ज्ञापन जटाशंकर दास जी की पुत्रवधू कविता दास ने किया। वक्ताओं ने जटाशंकर दास स्मृति पर्व समारोह प्रत्येक वर्ष आयोजित करने के लिए जटा बाबू के पुत्र व वरिष्ठ जदयू नेता अनिल कुमार दास की सराहना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ जटाशंकर दास जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। अतिथियों को पाग दोपटा एवं माला से मिथिला पेंटिंग से सम्मानित किया गया। सम्मानित करने वालों में लोकहित रंगपीठ प्रशिक्षण केन्द्र की इंचार्ज रूपा कुमारी, प्रशिक्षु आकृति, खुशबू, ज्योति, अंजली ने किया वहीं शिवानी, सीमा, रुपाली और सीमा ने स्वागतगान से सभी का मनमोह लिया। इस मौके पर लोकहित रंगपीठ संस्थान के प्रशिक्षण केन्द्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाली प्रशिक्षुओं को मोमेंटो व प्रमाण-पत्र देकर अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।

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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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