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उड़ान भरते ही हादसे का शिकार हुआ अमेरिकी बी-52 बमवर्षक, आठ की मौत

लास एंजिलिस, एपी | अमेरिका की वायुसेना का एक बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बमवर्षक विमान सोमवार को उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दक्षिण कैलिफोर्निया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा इतना भीषण था कि विमान आग के गोले में तब्दील हो गया और उसमें सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना सुबह करीब 11:20 बजे कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के पास हुई। विमान नियमित परीक्षण मिशन पर था और उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटना का शिकार हो गया। घटना के बाद रनवे के आसपास घना काला धुआं फैल गया, जिसे कई किलोमीटर दूर से देखा गया।

हादसे के कारणों की जांच शुरू
वायुसेना ने बताया कि विमान में सैन्यकर्मियों के साथ कुछ सरकारी ठेकेदार भी सवार थे। एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के उप कमांडर कर्नल जेम्स हेज ने प्रेस वार्ता में कहा, “इस दुर्घटना में कोई भी जीवित नहीं बच सका। हमने आठ अमेरिकियों को खो दिया है।” हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है, हालांकि अभी तक दुर्घटना की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। विमान के मलबे की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंच गई है।

2016 के बाद पहली बड़ी दुर्घटना
विमान दुर्घटनाओं के अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 2016 के बाद यह पहला बड़ा हादसा है जिसमें बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस शामिल रहा है। इससे पहले मई 2016 में गुआम द्वीप पर भी एक बी-52 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।
सात दशक से सेवा में है बी-52
बोइंग द्वारा निर्मित बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस अमेरिकी वायुसेना का लंबी दूरी तक मार करने वाला रणनीतिक बमवर्षक विमान है। वर्ष 1955 में सेवा में शामिल किए गए इस विमान को पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के हथियार ले जाने के लिए विकसित किया गया था। वियतनाम युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया के कई सैन्य अभियानों तक इसका व्यापक उपयोग किया गया है। हाल के वर्षों में अमेरिकी वायुसेना ने बी-52 बेड़े के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया शुरू की है। इसी क्रम में उन्नत रडार प्रणाली से लैस एक आधुनिकीकृत बी-52 विमान को परीक्षण के लिए एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस भेजा गया था, जहां उसकी उड़ान और तकनीकी क्षमता की जांच की जा रही थी।

क्या बी-52 हादसे के पीछे कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकेत?

अमेरिका और ईरान के बीच हाल के महीनों में परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है। हालांकि, इजरायल लंबे समय से किसी भी ऐसे समझौते का विरोध करता रहा है, जिससे ईरान की परमाणु क्षमताओं पर उसकी नजर में पर्याप्त अंकुश न लगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल की प्राथमिकता ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को पूरी तरह सीमित करना है, जबकि अमेरिका कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता रहा है। ऐसे में दोनों सहयोगियों के बीच रणनीतिक मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। बी-52 दुर्घटना ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। सोशल मीडिया और कुछ वैकल्पिक मंचों पर इस हादसे को संभावित साजिश से जोड़ने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक अमेरिकी वायुसेना या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी ने तोड़फोड़, हमले या बाहरी हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं की है। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस दुर्घटना को तकनीकी खराबी, मानवीय त्रुटि या किसी अन्य कारण से जोड़ने के साथ-साथ किसी विदेशी शक्ति की भूमिका का दावा करना महज अटकल माना जाएगा।

 

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विजय झा

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