नई दिल्ली/एजेंसी | पहाड़ी राज्यों में मानसून ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बादल फटने और भूस्खलन से भारी तबाही हुई है। मलबे और कीचड़ के सैलाब से कई मुख्य हाईवे और 72 से अधिक संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं। नदियां उफान पर हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।
जानकारी के अनुसार, जम्मू संभाग के किश्तवाड़ में रविवार रात बादल फटा। मलबे की चपेट में आने से निर्माणाधीन 540 मेगावाट की क्वार जल विद्युत परियोजना के पास खड़े कई वाहन दब गए। हालांकि, उस समय वहां किसी कर्मचारी के नहीं होने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं डोडा-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी मात्रा में चट्टानें और कीचड़ जमा होने से आवाजाही रोक दी गई है। डोडा के ही प्रेम नगर बाजार में बादल फटने से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि मलबा ऊंचाई पर स्थित बाजार तक पहुंच गया। कई गाड़ियां मलबे में समा गईं। निचले इलाके के कुछ मकानों और एक मंदिर को भी नुकसान पहुंचा है।
शिमला का रिज मैदान धंसा, कई पुल और सड़कें बहीं
सोमवार को हिमाचल प्रदेश के रोहतांग, शिंकुला और बारालाचा में हल्का हिमपात हुआ। वहीं शिमला में ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च के पास भूस्खलन से सुरक्षा दीवार ढह गई। इसके चलते रिज मैदान का एक हिस्सा धंस गया है। दूसरी ओर, भारी वर्षा के कारण कुल्लू के इनर अखाड़ा बाजार में फिर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। पिछले वर्ष यहां मलबे में दबने से 10 लोगों की मौत हुई थी।
चारधाम यात्रा मार्ग ठप, नदियां उफान पर
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण चारधाम यात्रा मार्ग मलबा आने से बार-बार बाधित हो रहे हैं। राज्य की 72 से अधिक संपर्क सड़कें बंद हैं। बागेश्वर में अतिवृष्टि और भूस्खलन से कई मकान ढह गए हैं। भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, सरयू और गोमती समेत राज्य की अधिकांश नदियां खतरे के निशान के पास बह रही हैं। प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है।










