- सांसद गिरिराज सिंह के बदले रुख पर उठे सवाल
बेगूसराय (सिमरिया) | सिमरिया सिक्स लेन पुल के गोलंबर पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की आदमकद प्रतिमा लगाने की मांग तेज हो गई है। ग्रामीण पुल का नाम ‘दिनकर सेतु’ रखने की भी मांग कर रहे हैं। इसे लेकर रविवार शाम सिमरिया के ग्रामीणों ने जोरदार आक्रोश मार्च निकाला। यह मार्च दिनकर आवास से शुरू हुआ और पंचायत भवन के प्रांगण में आकर सभा में तब्दील हो गया। इसका आयोजन ‘राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति विकास समिति’ और ‘दिनकर पुस्तकालय’ ने मिलकर किया था। लोगों के आक्रोश की मुख्य वजह स्थानीय सांसद व केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का हालिया पत्र है।
सड़क से संसद तक लड़ाई की चेतावनी
मार्च को संबोधित करते हुए बीएचयू के प्रोफेसर रामाज्ञा शशिधर ने कहा, “राष्ट्रवादी सत्ता दिनकर को उनकी जन्मभूमि से बेदखल करना चाहती है। हम इस कुचक्र को हर हाल में विफल करेंगे।” समिति के सचिव कृष्ण कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि दिनकर हमारे गौरव हैं और गोलंबर पर उनके अलावा कोई और नाम स्वीकार नहीं होगा। राजेश कुमार सिंह और राधारमण राय ने कहा कि सांसद ने जनता के साथ छल किया है। इस वादाखिलाफी का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

पीछे नहीं हटेंगे ग्रामीण
समिति के सचिव प्रदीप कुमार ने कहा कि हमें दिनकर की मूर्ति और महासेतु के नाम के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। इसके लिए सरकार से भी टकराना पड़े, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। रामनाथ सिंह ने इसे सत्ता का दोहरा चरित्र बताया। वहीं, अमरदीप सुमन ने चेतावनी दी कि यदि गोलंबर पर किसी अन्य की मूर्ति लगाने की कोशिश हुई, तो आर-पार की लड़ाई होगी। जिला परिषद उपाध्यक्ष राजीव कुमार सिंह ने कहा कि हमारी यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। इस मौके पर मुखिया प्रतिनिधि गोपाल कुमार, राजेन्द्र राय, विश्वंभर सिंह, संजीव फिरोज, विनोद बिहारी, गुलशन कुमार और कृष्ण मुरारी समेत सैकड़ों युवा और ग्रामीण मौजूद थे।
सांसद के अलग-अलग पत्रों से उपजा विवाद
- पहला स्टैंड : 28 मई 2025 को सांसद गिरिराज सिंह ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और तत्कालीन बिहार पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने पुल का नाम ‘दिनकर सेतु’ करने और प्रवेश द्वार पर दिनकर की प्रतिमा लगाने की अनुशंसा की थी।
- नया स्टैंड : 13 महीने बाद, 1 जुलाई 2026 को सांसद ने राज्यमंत्री अजय टम्टा को एक नया पत्र लिखा। इसमें दिनकर का जिक्र तक नहीं है। इसके बजाय गोलंबर पर भामाशाह की प्रतिमा लगाने की अनुशंसा कर दी गई।










