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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद बरकरार

  • गुजरात हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
  • मृतक के परिजनों को 10-10 लाख देगी सरकार
  • गंभीर रूप से घायलों को 5-5 लाख मुआवजा मिलेगा

अहमदाबाद/एजेंसी | गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने विशेष कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी है। इसके तहत 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी गई है। वहीं, 11 अन्य दोषियों की आजीवन कारावास की सजा भी कायम रहेगी। इन धमाकों में 56 मासूमों की जान गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ितों के लिए मुआवजे का भी निर्देश दिया है। धमाकों में मारे गए लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा गंभीर रूप से घायलों को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा।

याचिकाएं खारिज, विशेष अदालत का फैसला सही
जस्टिस एवाई कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। बेंच ने दोषियों की ओर से दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया। बता दें कि विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में इन सभी को सजा सुनाई थी। देश के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी अदालत ने एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। सरकारी वकील अमित पटेल ने बताया कि इस मामले की मार्च 2025 से रोजाना सुनवाई हो रही थी।
दंगों का बदला और क्रूर साजिश
यह धमाके इंडियन मुजाहिदीन और सिमी के आतंकियों ने किए थे। इनका मुख्य मकसद गुजरात दंगों का बदला लेना था। दोषियों में सिमी का पूर्व सरगना सफदर नागोरी भी शामिल है। यह सभी आतंकी 11 अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं। हाई कोर्ट ने भी इसे ‘रेअर ऑफ द रेअर’ (दुर्लभ से दुर्लभ) मामला माना। अदालत ने कहा कि घायलों को जब अस्पताल लाया गया, तब सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर के बाहर धमाका करना बेहद क्रूर कृत्य था।
एक फोन नंबर से खुला था राज
तत्कालीन जांच टीम (SIT) के प्रमुख रहे आइपीएस अभय चूडास्मा ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि जांच की शुरुआत सिर्फ एक फोन नंबर से हुई थी। इसके जरिए पुलिस पांच अन्य नंबरों तक पहुंची और पूरी साजिश का भंडाफोड़ हो गया। गुजरात पुलिस ने 6 हजार से ज्यादा दस्तावेजी सबूत कोर्ट में पेश किए थे।
35 मामलों पर एक साथ चला मुकदमा
यह मुकदमा कुल 35 अलग-अलग पुलिस केस को मिलाकर चलाया गया। इसमें अहमदाबाद में हुए 21 धमाकों से जुड़ी 20 एफआइआर शामिल थीं। इसके अलावा सूरत के 15 केस भी जोड़े गए थे, जहां आतंकियों के लगाए बम फटे नहीं थे।
जीवन भर का दर्द दे गए धमाके
धमाकों में घायल हुए पूर्व मंत्री प्रदीप परमार ने हाई कोर्ट के फैसले को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा, “धमाके के बाद जब मैं सिविल अस्पताल पहुंचा, तो वहां हुए ब्लास्ट का शिकार हो गया। आज मैं आजीवन कमर में बेल्ट बांधने को मजबूर हूं, इसके बिना मैं चल-फिर नहीं सकता।”

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विजय झा

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