- दिवंगत आरक्षक की पत्नी बोलीं- यह सिस्टम की कैसी चूक?
अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) | सरकारी सिस्टम की एक चूक ने दिवंगत आरक्षक के परिवार के जख्म फिर हरे कर दिए। जिस व्यक्ति का 42 दिन पहले निधन हो चुका था, उसकी पत्नी के मोबाइल पर 6 अगस्त को अस्पताल की ओर से स्वस्थ होकर घर लौटने का संदेश पहुंच गया। संदेश में लिखा था- ‘प्रिय देवनारायण राम, हमें खुशी है कि आप स्वस्थ होकर अपने घर जा रहे हैं।’ यह संदेश देख और पढ़कर दिवंगत आरक्षक की पत्नी सीमा कुजुर स्तब्ध रह गईं। उन्होंने सरकारी पोर्टल और अस्पताल की डाटा एंट्री व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल से उनका आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो चुका है। बावजूद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के सिस्टम में उन्हें स्वस्थ दिखाया गया और उनके घर जाने का संदेश भेज दिया गया। मामला अंबिकापुर मेडिकल कालेज अस्पताल से जुड़ा है। देवनारायण राम पुलिस विभाग में आरक्षक थे। पत्नी सीमा कुजुर जशपुर जिले में स्टाफ नर्स है।
30 जून को हुआ था निधन
सीमा कुजुर के अनुसार, पति की तबीयत खराब होने पर उन्हें 26 जून 2026 को मेडिकल कालेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 30 जून को उनकी मृत्यु हो गई। परिवार ने अंतिम संस्कार भी कर दिया। उनकी मृत्यु का आधिकारिक प्रमाण पत्र भी बन चुका है।
‘जिसे खो दिया, उसे स्वस्थ कैसे बता दिया?’
सीमा कुजुर का कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं है। इसके पीछे सिस्टम की गंभीर चूक है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वह जानना चाहती हैं कि आखिर मरीज की मृत्यु के बाद भी सरकारी रिकार्ड में उनकी स्थिति कैसे अपडेट हुई। किस स्तर पर केस क्लोज किया गया। किस आधार पर उन्हें डिस्चार्ज दिखाया गया। और सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिस्टम ने मृत्यु की जानकारी अपडेट होने के बावजूद स्वस्थ होने का संदेश कैसे भेज दिया।
अस्पताल ने कहा- आटो जनरेट होते हैं संदेश
मेडिकल कालेज अस्पताल के अधीक्षक डा. आरसी आर्या ने बताया कि आयुष्मान सारथी से संदेश आटो जनरेट होकर भेजे जाते हैं। केस क्लोज होने के बाद सिस्टम स्वत: संदेश भेज देता है। कई बार संदेश भेजने में समय भी लग जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में ऐसा कैसे हुआ, यह जांच का विषय है। पूरे प्रकरण का परीक्षण कराया जाएगा। यह पता लगाया जाएगा कि चूक किस स्तर पर हुई। इसकी रिपोर्ट भी ली जाएगी।
तकनीक के पीछे छिपी मानवीय चूक
आयुष्मान सारथी, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थियों के लिए शुरू किया गया आधिकारिक वाट्सएप एआइ चैटबाट और मोबाइल एप है। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी मोबाइल के माध्यम से उपलब्ध कराना है।, लेकिन देवनारायण राम के मामले में यही तकनीकी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। मरीज की मृत्यु के बाद भी रिकार्ड में ऐसी स्थिति बनी रही, जिससे सिस्टम ने उन्हें स्वस्थ मान लिया। इसके बाद परिवार के मोबाइल पर डिस्चार्ज से जुड़ा संदेश पहुंच गया। सरकारी अस्पतालों में डाटा एंट्री और डिजिटल रिकार्ड अब स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में मरीज की मृत्यु जैसी महत्वपूर्ण जानकारी का सही तरीके से दर्ज होना बेहद जरूरी है। एक छोटी सी डाटा एंट्री चूक भी परिवार के लिए बड़ा मानसिक आघात बन सकती है।
परिवार ने मांगा जवाब
दिवंगत आरक्षक की पत्नी ने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि किसी मरीज की मृत्यु दर्ज होने के बाद उसके नाम से स्वास्थ्य या डिस्चार्ज संबंधी कोई गलत संदेश स्वजन तक न पहुंचे। देवनारायण राम अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन सरकारी सिस्टम से आया एक संदेश परिवार को यह सवाल जरूर दे गया है कि जब मृत्यु का प्रमाण सरकारी कागजों में दर्ज हो चुका था, तो डिजिटल सिस्टम में उनकी ‘जिंदगी’ आखिर कैसे जारी रही?











