- अब पूरे बीहट में फैलाएंगे डिजिटल सुरक्षा का संदेश
- विद्यालय में साइबर सुरक्षा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर कार्यशाला आयोजित
बीहट (बेगूसराय) | राजकीयकृत मध्य विद्यालय, बीहट में शुक्रवार को साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें कक्षा छह से आठ तक के करीब 350 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम साइबरवाणी फाउंडेशन के तत्वावधान में हुआ। आइआइटी दिल्ली से साइबर सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई कर लौटे साइबरवाणी फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष शशांक शेखर और उनकी टीम ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी फर्जी लिंक, संदिग्ध संदेश, एपीके फाइल, ओटीपी सत्यापन, केवाईसी अपडेट, सोशल मीडिया संपर्क और यूपीआइ भुगतान जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर बच्चों एवं उनके परिवारों को ठगी का शिकार बनाने का प्रयास करते हैं। विद्यार्थियों को समझाया गया कि डिजिटल दुनिया में छोटी-सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
सोशल मीडिया के जोखिमों को पहचानना जरूरी
कार्यशाला में सोशल मीडिया के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग, निजी जानकारी की सुरक्षा, संदिग्ध लिंक एवं संदेशों की पहचान, डिजिटल गोपनीयता, सुरक्षित आनलाइन व्यवहार तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक एवं जिम्मेदार उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल एवं रोचक तरीके से समझाया गया। बच्चों को यह भी बताया गया कि एआइ ज्ञान और रचनात्मकता का शक्तिशाली माध्यम है, लेकिन उसके दुरुपयोग और उससे जुड़े जोखिमों को पहचानना भी जरूरी है।

‘साइबर सुपरहीरो की शपथ’ बना विशेष आकर्षण
कार्यशाला का विशेष आकर्षण रहा ‘साइबर सुपरहीरो की शपथ’, जिसमें विद्यार्थियों ने सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने, संदिग्ध गतिविधियों में सावधानी बरतने तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों को साइबर अपराधों से बचाने के लिए जागरूक करने का संकल्प लिया। बच्चों को प्रेरित किया गया कि वे अपने माता-पिता, भाई-बहन, पड़ोसियों और परिचितों को साइबर ठगी से बचाव के उपाय बताकर अपने घर और समाज के ‘साइबर चैंपियन’ बनें।
हेल्पलाइन 1930 की जानकारी बनी व्यावहारिक सुरक्षा का सूत्र
सत्र के दौरान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 की उपयोगी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि आनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में घबराने या चुप बैठने के बजाय तत्काल 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण है। समय पर सही कदम उठाना साइबर ठगी से होने वाले नुकसान को सीमित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
साइबर सुरक्षा भविष्य का आवश्यक जीवन-कौशल : रंजन
विद्यालय के प्रधानाध्यापक रंजन कुमार ने कहा, “साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्कता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बेहतर समझ आने वाले समय के आवश्यक जीवन-कौशल का हिस्सा होगी। आज के बच्चे कल के डिजिटल पहचान वाले नागरिक भी हैं। इसलिए साइबर सुरक्षा केवल किसी एक जागरूकता कार्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की एक आवश्यक जीवन-कौशल है। हमारा प्रयास है कि बच्चे स्वयं सुरक्षित डिजिटल व्यवहार सीखें और अपने परिवार तथा समाज में भी साइबर जागरूकता के वाहक बनें।”
जानकारियों को दूसरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेते हैं बच्चे : अनुपमा
विद्यालय की पाठ्यसहगामी गतिविधियों की समन्वयक एवं वरिष्ठ स्नातक शिक्षक अनुपमा सिंह ने कहा, “बच्चों की सक्रिय सहभागिता और जिज्ञासा ने कार्यशाला को बेहद प्रभावी बनाया। जब साइबर सुरक्षा को वास्तविक परिस्थितियों और गतिविधियों से जोड़कर समझाया जाता है, तो बच्चे केवल जानकारी ग्रहण नहीं करते, बल्कि उसे अपने व्यवहार में उतारने और दूसरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी स्वीकार करते हैं।”
बच्चों के सवालों ने किया प्रभावित
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े अनेक व्यावहारिक एवं जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे। अंशुमन, कर्ण, शबनम, स्वीकृति, माही, अदिति, दिव्या सहित दर्जनों विद्यार्थियों के सवालों ने कार्यशाला के अतिथियों को प्रभावित किया। कार्यक्रम में कक्षा 6 से 8 के अधिकांश कक्षा-मानिटर, सभी हाउस लीडर्स, बाल संसद तथा इको क्लब के विद्यार्थियों की विशेष एवं सक्रिय भागीदारी रही।













