- पटना के दो फ्लैट से 68 लाख और बेगूसराय घर से 7 लाख कैश बरामद
- अलमारी, बक्से और पलंग में छिपाकर रखा था कैश
- दंपती पर आय से 1.06 कराेड़ रुपए अधिक का केस दर्ज
पटना | पटना के एडीएम (सप्लाई) रवींद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी भ्रष्टाचार के मामले में फंस गए हैं। कुमारी स्वीटी दानापुर में सब-रजिस्ट्रार हैं। दोनों पर आय से 1.06 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति का केस दर्ज हुआ है। निगरानी ब्यूरो ने उनके चार ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है।
6 घंटे चली छापेमारी, मशीन से गिने गए नोट
छापेमारी लगातार छह घंटे चली। पटना के रूपसपुर स्थित कश्यप ग्रीन सिटी के दो फ्लैट खंगाले गए। पटना और दानापुर स्थित दोनों के कार्यालयों की तलाशी ली गई। टीम ने बेगूसराय के पोखरिया स्थित पुश्तैनी मकान पर भी दबिश दी। कुल 75 लाख रुपये नकद बरामद हुए। पटना के फ्लैट से 68 लाख और बेगूसराय के घर से 7 लाख रुपये कैश मिला। नोटों की गिनती के लिए कैश मशीन मंगवानी पड़ी।

पलंग और बक्सों में छिपा था खजाना
शुरुआत में अलमारी से केवल छह लाख रुपये मिले। डीजी के निर्देश पर जब गहराई से तलाशी ली गई, तो बड़ा खुलासा हुआ। कैश को बक्से, पलंग और वार्डरोब में छिपाकर रखा गया था। 500-500 के नोटों के कई बंडल मिले।
घड़ियों का शौक और बेनामी संपत्ति
कैश के अलावा 250 ग्राम सोने-चांदी के गहने बरामद हुए। मौके से 40 महंगी और ब्रांडेड घड़ियां मिली हैं। कई जमीन और फ्लैट के कागजात भी हाथ लगे हैं। निगरानी के डीजी जेएस गंगवार के मुताबिक, बेनामी संपत्ति और बैंक लाकरों की जांच जारी है।
16 साल में शिक्षक से बने करोड़पति
रवींद्र दिवाकर पहले शिक्षक थे। 2010 में वे बिहार प्रशासनिक सेवा में आए। वे गया में एसडीएम और सारण में डीपीआरओ भी रह चुके हैं। उनकी पत्नी 2013 में सब-रजिस्ट्रार बनीं। 16 साल की नौकरी में ही दोनों करोड़पति बन गए। एडीएम के तौर पर रवींद्र का काम राशन वितरण की निगरानी और कालाबाजारी रोकना था। इसी जिम्मेदारी का दुरुपयोग कर उन्होंने यह काली कमाई की।









