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​​​​​MLC Election : उपलब्धियों का भारी-भरकम थैला लेकर फिर मैदान में सर्वेश कुमार

  • दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव
  • अब निर्दलीय नहीं भाजपा प्रत्याशी
  • एनडीए की टीम फील्ड सजाने जुटी

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के लिए सर्वेश कुमार फिर मैदान में हैं। 5 अक्टूबर को हजारों समर्थकों की उपस्थिति में ढोल-नगाड़े की थाप के बीच दरभंगा के लहेरियासराय स्थित समाहरणालय में उन्होंने नामांकन किया। इस दौरान एनडीए गठबंधन के मंत्री, विधायक, सांसद और भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। फूल मालाओं से लदे सर्वेश कुमार ने विक्ट्री चिन्ह बनाया। उनका आत्मविश्वास बता रहा था कि वे जीत को लेकर आश्वस्त हैं। हों भी क्यों न चुनाव की रणभेरी बजने से पहले ही इंडी गठबंधन के घटक दलों राजद और कांग्रेस ने अलग-अलग प्रत्याशी घोषित कर महागठबंधन में दरार होने के संकेत दे दिए थे।

सर्वेश कुमार सौम्य और शालीन व्यक्तित्व के धनी हैं। उनके पास दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए तो योजनाएं हैं ही, बिहार के विकास को लेकर एक रोडमैप भी है। जब एक पत्रकार के नाते आप उनसे मिलते हैं और आप जब बिहार के बारे में उनका विजन देखते हैं तो सवाल करना भूल जाते हैं। मुझे लगता है कि सम्राट सरकार जो ऐसे सुझावों पर उदारतापूर्वक अमल करने को तत्पर रहती है, सर्वेश कुमार को विजयश्री हासिल होने के बाद उनका और भी बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। वह मंत्री पद भी हो सकता है।

वर्ष 2020 से 2026 के अपने खत्म हो रहे छह वर्षीय कार्यकाल में एक तरह से उन्होंने बेहतर कार्यों की झड़ी ही लगा दी। कुछ महत्वपूर्ण बिंदु देखें –

  1. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के डा. नागेन्द्र झा स्टेडियम के पुनर्निर्माण के लिए ऐच्छिक कोष से 01 करोड़ रुपये।
  2. स्कूल-कालेजों में आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता एवं शैक्षणिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 450 योजनाओं के लिए पांच करोड़ की राशि।
  3. बेगूसराय, समस्तीपुर, दरभंगा एवं मधुबनी जिले में कुल 60 शैक्षणिक संस्थाओं के लिए नौ करोड़ की राशि।
  4. बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम से विश्वविद्यालय की स्थापना को कैबिनेट से स्वीकृति और 15 करोड़ का आवंटन।
  5. वित्त रहित कालेजों के अधिग्रहण का प्रयासरत।
  6. पशुपालकों एवं किसानों के हित में पशु प्रजनन नीति 2025 को विधानमंडल से पारित कराने में महत्वपूर्ण योगदान।
  7. सिमरिया घाट को सिमरिया धाम में बदलने को प्रयास। इस दौरान काफी कुछ बदला भी।
  8. मधुबनी के फुलहर स्थित बाग तड़ाग, पुष्प वाटिका पर्यटन स्थल के रूप में विकास को प्रयासरत तथा महाकवि कालिदास का स्मृति समारोह का आयोजन प्रतिवर्ष करने हेतु भी निरंतर प्रयासरत हैं।
  9. सीएसआर फंड की राज्य में उपयोगिता के लिए विधान परिषद में प्रश्न उठाया। विधानमंडल ने इसके लिए नीति बनाई।
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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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