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बरौनी रिफाइनरी प्रबंधन के खिलाफ BTMU का आमरण अनशन शुरू

  • बाबा साहब की प्रतिमा के समक्ष 10 सूत्री मांगों पर अड़े यूनियन नेता
  • IOC बरौनी प्रबंधन पर लगाया श्रम कानून उल्लंघन का आरोप

बेगूसराय | बरौनी तेल शोधक मजदूर यूनियन (बीटीएमयू) के तीन पदाधिकारियों ने सोमवार से बरौनी रिफाइनरी परिसर में बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष आमरण अनशन शुरू कर दिया। यूनियन ने रिफाइनरी प्रबंधन पर श्रम कानूनों की अनदेखी और मजदूरों के शोषण का आरोप लगाया है। यूनियन की ओर से 10 सूत्री मांगें रखी गई हैं। इनमें संगठित और असंगठित कर्मचारियों को श्रम कानून के तहत सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने, रिफाइनरी टाउनशिप में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने और कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल सिस्टम का पालन सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख है।

प्रबंधन कर रहा है तानाशाही : रजनीश कुमार
अनशन पर बैठे बीटीएमयू के कार्यकारी अध्यक्ष रजनीश कुमार ने कहा कि रिफाइनरी प्रबंधन और इंडियन आयल लगातार मजदूरों और मजदूर नेताओं को प्रताड़ित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ट्रेड यूनियन को कमजोर करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि बरौनी रिफाइनरी में श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और ठेका मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन किसी भी कानून का पालन करने को तैयार नहीं है। यूनियन प्रतिनिधि जब अपनी समस्याओं को लेकर बातचीत करने जाते हैं तो उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। उन्होंने प्रबंधन की कार्यशैली को तानाशाहीपूर्ण बताया।
अधिकारों की रक्षा के लिए पहली बार अनशन पर बैठ रहे : संजीव कुमार
बीटीएमयू के अतिरिक्त महासचिव संजीव कुमार ने कहा कि बरौनी रिफाइनरी को स्थापित हुए 60 वर्ष और यूनियन को 57 वर्ष हो चुके हैं। इसके बावजूद पहली बार उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष अनशन पर बैठना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यूनियन हमेशा बातचीत के पक्ष में रही है, लेकिन प्रबंधन संवाद से बच रहा है। उन्होंने दावा किया कि रिफाइनरी में करीब 25 हजार ठेका मजदूर कार्यरत हैं और उनकी छंटनी की जा रही है। यूनियन चाहती है कि रिफाइनरी में बेहतर माहौल और सुचारु व्यवस्था बनी रहे, लेकिन प्रबंधन इस दिशा में सकारात्मक पहल नहीं कर रहा है। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा।

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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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