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पूर्व MLC सर्वेश कुमार ने विकसित बिहार के लिए सीएम को सौंपा 10 सूत्री प्रस्ताव

  • सम्राट चौधरी से की मुलाकात, रोजगार, उद्योग, शिक्षा और कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए दिए सुझाव

पटना | बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दरभंगा स्नातक क्षेत्र के पूर्व विधान पार्षद सर्वेश कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास से जुड़े 10 सूत्री सुझावों का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा। इसमें वित्तीय संसाधनों के विस्तार, बैंकिंग व्यवस्था में सुधार, उद्योगों को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन, पशुपालन, सौर ऊर्जा, शिक्षा और पर्यटन विकास पर जोर दिया गया है।
सर्वेश कुमार ने राज्य के आंतरिक संसाधनों की समीक्षा और राजस्व के नए स्रोत तलाशने के लिए तमिलनाडु की तर्ज पर विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (पीएसएल) के तहत प्रतिवर्ष करीब 40 हजार करोड़ रुपये की कमी रहती है। वहीं, ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास निधि (आरआइडीएफ) के तहत उपलब्ध करीब 2,500 करोड़ रुपये की राशि बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए बैंकों के साथ समन्वय कर शेष राशि भी चार प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

सीएसआर फंड बढ़ाने और उद्योगों को सुविधा देने पर जोर
प्रस्ताव में जिला स्तर पर ऋण वितरण की समीक्षा और बैंकों की जवाबदेही तय करने की बात भी शामिल है। इसके लिए जिला स्तरीय बैंकर्स समिति (डीएलबीसी) के माध्यम से निगरानी व्यवस्था प्रभावी बनाने का सुझाव दिया गया। उन्होंने सीएसआर फंड का लाभ बिहार को अधिक दिलाने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, देश में प्रतिवर्ष करीब 35 हजार करोड़ रुपये सीएसआर मद में खर्च होते हैं, जबकि बिहार को केवल 200 से 300 करोड़ रुपये मिलते हैं। सीएसआर सोसाइटी और पोर्टल को प्रभावी बनाकर कंपनियों से समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि राज्य को प्रतिवर्ष तीन से चार हजार करोड़ रुपये मिल सकें।
प्रधानमंत्री कुसुम योजना का हो विस्तार
रोजगार और उद्योग के क्षेत्र में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं को एक जगह उपलब्ध कराने तथा उद्यमियों की सहायता के लिए प्रत्येक जिले में नोडल फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित करने का सुझाव दिया। सूक्ष्म उद्यमियों को दी जाने वाली पांच लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी के उपयोग और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करने की भी बात कही। वहीं, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री कुसुम योजना और रूफटाप सोलर योजना के विस्तार पर जोर दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार, देश में पीएम-कुसुम योजना के तहत करीब 30 लाख सोलर पंप संचालित हैं, जबकि बिहार में इनकी संख्या 30 हजार से कम है।
पशुपालन, सौर ऊर्जा और शिक्षा में सुधार की पहल
पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बछिया पैदा करने वाले सीमेन की उपलब्धता बढ़ाने का सुझाव दिया गया। वर्तमान में इसकी उपलब्धता करीब 50 हजार बताते हुए इसे बढ़ाकर एक करोड़ करने का लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही गई। इससे पशुओं की नस्ल में सुधार के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मेधा उत्सव आयोजित करे सरकार
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य के करीब 42 हजार प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक स्कूल से पांचवीं कक्षा के पांच मेधावी विद्यार्थियों का चयन कर प्रतिवर्ष दो दिसंबर को मेधा उत्सव आयोजित करने का सुझाव दिया गया। यह आयोजन पूर्व राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर करने की बात कही गई।
विदेश में रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देने का सुझाव
श्रमिक कल्याण के तहत विदेश मंत्रालय में पंजीकृत निजी एजेंसियों के माध्यम से बिहार के युवाओं को विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने की पहल करने का सुझाव दिया गया। इसके लिए राज्य के 100 आइटीआइ केंद्रों में युवाओं को विदेशों में रोजगार के लिए जरूरी कौशल का प्रशिक्षण देने की बात कही गई। पर्यटन विकास के लिए जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, वियतनाम और थाईलैंड के टूर ऑपरेटरों के साथ समन्वय स्थापित करने का सुझाव दिया गया। इन देशों में बिहार के बौद्ध पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार कर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री की सकारात्मक प्रतिक्रिया
मुलाकात के दौरान माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन सभी 10-सूत्री सुझावों पर गहरी रुचि दिखाई और अपने सकारात्मक विचार व्यक्त किए। जानकारों का मानना है कि इन प्रस्तावों पर यदि धरातल पर अमल होता है तो राज्य के आर्थिक विकास को एक नई गति मिलेगी। पूर्व एमएलसी सर्वेश कुमार ने इस दौरान दोहराया कि उनका एकमात्र उद्देश्य बिहार के संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करना, युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलना और किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि करना है ताकि एक आत्मनिर्भर और विकसित बिहार का सपना जल्द से जल्द साकार हो सके।
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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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