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Weekend Vision : शिक्षा हमें दुनिया के तमाम दुःखों और आडंबरों से मुक्ति दिलाती है : डॉ. सुशांत

शिक्षा महत्वपूर्ण है। यह हमें दुनिया के तमाम दुःखों और आडंबरों से मुक्ति दिलाती है। ये बातें डॉ. सुशांत भास्कर ने मध्य विद्यालय, बीहट में छात्रों से कहीं।
  • मध्य विद्यालय, बीहट में वीकेंड विजन की छठी कड़ी आयाेजित
  • विद्यार्थी जीवन और गांधी दर्शन पर आधारित रहा संवाद सत्र

बेगूसराय (बीहट) | शिक्षा काफी महत्वपूर्ण है। यह हमें दुनिया के तमाम दुःखों और आडंबरों से मुक्ति दिलाती है। इसलिए ज्ञान प्राप्ति की भूख को हमेशा बनाए रखें। समाज सेवा को अपनाकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं तथा सामाजिक न्याय-समानता और सद्भाव को बढ़ावा दें। ये बातें संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सीनियर फेलो व विख्यात इतिहासकार एवं पुरातत्वविद् डॉ. सुशांत भास्कर ने मध्य विद्यालय, बीहट में आयोजित ‘वीकेंड विजन’ की छठी कड़ी में बच्चों से कहीं। यह संवाद सत्र विद्यार्थी जीवन और गांधी दर्शन पर केंद्रित था।


डॉ. सुशांत ने गांधी जी के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक संदर्भों और उनके सिद्धांतों को विद्यार्थियों के समक्ष विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने गांधी जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को साझा करते हुए विद्यार्थियों को उनके सिद्धांतों से जोड़ने का प्रयास किया।

अहिंसा और सहनशीलता को जीवन व्रत बनाएं
गांधी जी के जीवन से विद्यार्थियों को अपनाने योग्य महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सत्य और ईमानदारी का पालन करें, अहिंसा और सहनशीलता को जीवन व्रत बनाएं तथा हिंसा का उत्तर प्रेम और धैर्य से दें। आत्मनिर्भरता को अपनाकर स्वावलंबी बनें और अपने कार्य स्वयं करें। सादगी और स्वावलंबन को अपनाकर जीवन में दिखावे से बचें और सरलता अपनाएं।


फर्स्ट सीजन के वीकेंड विजन की यह आखिरी कड़ी थी : अनुपमा
विद्यालय की वरिष्ठ स्नातक शिक्षिका श्रीमती अनुपमा सिंह ने कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन करते हुए कहा कि आज फर्स्ट सीजन के वीकेंड विजन की आखिरी कड़ी में गांधी के जीवन दर्शन को लेकर विशेष संवाद सत्र में हम सभी मौजूद हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे गांधी जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं। इस अवसर पर विद्यालय शिक्षा समिति की सचिव, शिक्षकगण, इंटर्नशिप प्रशिक्षु, बाल संसद और इको क्लब के प्रतिनिधि तथा सभी हाउस लीडर सहित सभी विद्यार्थियों ने अपना उदगार व्यक्त किया।

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हिमांशु शेखर

पत्रकारिता ही की है अब तक।
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