- बीहट मध्य विद्यालय के बच्चों ने बुलंद की विश्व शांति की आवाज
- बाल संसद और ईको क्लब के विद्यार्थियों ने युद्ध के विरुद्ध उठाई आवाज
- ‘पोस्टर पिरामिड’, पेंटिंग्स और नारों से बच्चों ने मानवता का पक्ष रखा
- बच्चों की अपील — हथियार नहीं, शिक्षा और पर्यावरण पर खर्च करे दुनिया
बेगूसराय (बीहट) | राजकीयकृत मध्य विद्यालय, बीहट में विद्यालय की बाल संसद, चारों हाउस लीडर्स, क्लास मॉनिटर्स, यूथ एंड इको क्लब तथा ग्रीन क्लब के प्रतिनिधि विद्यार्थियों ने वैश्विक स्तर पर फैल रहे विनाशकारी युद्धों के विरुद्ध शांति, प्रेम, सौहार्द, सहयोग और भाईचारे के पक्ष में अत्यंत प्रभावशाली तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। विद्यालय की सृजनात्मक गतिविधियों की श्रृंखला “क्रिएटिव विजन” के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने युद्ध और मानवता के संकट पर आधारित आकर्षक पेंटिंग्स, प्रभावशाली पोस्टर्स, प्रेरक भाषण और मार्मिक स्लोगनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को गहन चिंतन के लिए विवश कर दिया। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा निर्मित “पोस्टर पिरामिड” रहा, जिसके माध्यम से बच्चों ने विश्व शांति का अनूठा संदेश दिया। बच्चों के पोस्टरों और नारों में – “जहां मिसाइल गिरते हैं, वहां बचपन के सपने मरते हैं”, “हमें किताबें दो, बंदूकें नहीं”, “युद्ध पर खर्च, विकास पर कर्ज”, “शांति ही सच्ची जीत है” और “एक मिसाइल लाखों पेड़ों के वर्षों के प्रयासों को मिटा देती है” जैसे संदेशों ने सभी को गहराई से प्रभावित किया।
विद्यार्थियों ने कहा कि विश्व में स्थायी शांति स्थापित होनी चाहिए तथा हर प्रकार के युद्ध पर वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। बच्चों ने यह भी रेखांकित किया कि युद्ध केवल जान-माल और आर्थिक संसाधनों की ही क्षति नहीं करता, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि एक मिसाइल या बम विस्फोट से निकलने वाली विषैली गैसें और विनाशकारी प्रभाव, लाखों वृक्षारोपण अभियानों के वर्षों के प्रयासों को कुछ ही क्षणों में नष्ट कर देते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व बैंक और आइएमएफ के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया ने बीते वर्षों में युद्ध और हथियारों पर जितना धन खर्च किया है, उससे करोड़ों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जा सकता था।

बच्चों की वैचारिक परिपक्वता ने प्रभावित किया
प्रसिद्ध शिक्षाविद्, आरटीई फोरम बिहार के राज्य संयोजक एवं पीयूसीएल बिहार के राज्य सचिव मंडल सदस्य अनिल कुमार राय ने बच्चों की वैचारिक परिपक्वता और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि जब बच्चे युद्ध के विरुद्ध और मानवता के पक्ष में आवाज उठाने लगते हैं, तब वह केवल विद्यालयी कार्यक्रम नहीं रह जाता, बल्कि पूरी दुनिया के लिए नैतिक संदेश बन जाता है। उन्होंने कहा कि यदि हथियारों पर खर्च होने वाली संपदा शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर खर्च होती, तो दुनिया कहीं अधिक सुरक्षित और संवेदनशील होती।
शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चों को विवेकशील नागरिक बनाना
विद्यालय के प्रधानाध्यापक रंजन कुमार ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चों को संवेदनशील और विवेकशील वैश्विक नागरिक बनाना है। यदि बच्चे आज युद्ध, पर्यावरण विनाश और मानवता के संकट पर गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं, तो यह शिक्षा की वास्तविक सफलता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के शक्तिशाली देशों को समझना होगा कि युद्ध किसी सभ्यता की उपलब्धि नहीं, बल्कि उसकी विफलता का प्रतीक है। कार्यक्रम के दौरान बाल संसद के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र संघ से समुचित हस्तक्षेप की मांग करते हुए भारत सरकार और राष्ट्रपति के नाम अपील पत्र भेजने का अनुरोध भी किया। बच्चों ने संयुक्त राष्ट्र संघ को भेजे जाने हेतु अपनी पेंटिंग्स और स्लोगन पोस्टर भी सौंपे।
भाईचारे, सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया
कार्यक्रम के सफल संचालन में वरिष्ठ शिक्षिका अनुपमा सिंह, प्रीति कुमारी, स्वयंसेवी शिक्षक अभिनव कुणाल और राजन कुमार सहित श्याम स्कूल ऑफ एजुकेशन के प्रशिक्षुओं ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में सुहानी, दिव्या, मीठी, सृष्टि, स्वीकृति, माही, दीपू, कल्याणी, पायल, शबनम और सौम्या शर्मा सहित दर्जनों विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने उपस्थित अतिथियों और शिक्षकों को अत्यंत प्रभावित किया। अंत में सभी विद्यार्थियों ने सामूहिक शांति शपथ लेते हुए मानवता, सह-अस्तित्व, भाईचारे और पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।









