बेगूसराय (बीहट) | सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, लेकिन राजकीयकृत मध्य विद्यालय बीहट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृत्ति (एनएमएमएस) परीक्षा में विद्यालय के सात विद्यार्थियों ने सफलता हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का सपना साकार किया, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में अंशु कुमार, शिवम कुमार, अनामिका कुमारी, मुस्कान कुमारी, माही कुमारी, सृष्टि कुमारी और उत्कर्ष कुमार का चयन हुआ है। इन विद्यार्थियों की सफलता के पीछे उनकी मेहनत के साथ-साथ वरिष्ठ स्नातक शिक्षिका अनुपमा सिंह और स्वयंसेवी शिक्षक राजन कुमार का सतत मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण रहा।
सतत मेहनत का परिणाम दिखता है
विद्यालय की यह उपलब्धि किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। यहां शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाता है। विज्ञान, गणित, साहित्य, खेल, कला, सांस्कृतिक गतिविधियों और नेतृत्व विकास जैसे क्षेत्रों में बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। यही कारण है कि विद्यालय के विद्यार्थी लगातार जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं।

बच्चों को मिल रही मजबूत शैक्षणिक संस्कृति
वरिष्ठ शिक्षिका अनुपमा सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता उनकी नियमित तैयारी, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है। वहीं प्रधानाध्यापक रंजन कुमार ने इसे विद्यालय की मजबूत शैक्षणिक संस्कृति और शिक्षकों की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में लागू नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों के सकारात्मक परिणाम अब लगातार सामने आ रहे हैं।
सरकारी विद्यालय किसी स्तर पर कम नहीं : विधायक
विद्यालय की इस उपलब्धि पर तेघड़ा विधायक रजनीश कुमार, पूर्व विधायक रामरतन सिंह, जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी बरौनी अनुरंजन कुमार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुभाष कुमार, नगर परिषद बीहट के मुख्य पार्षद बबीता कुमारी के अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने हर्ष व्यक्त किया है। सभी ने सफल विद्यार्थियों और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। विधायक रजनीश कुमार ने कहा कि यह सफलता इस बात का संदेश देती है कि यदि विद्यार्थियों को सही दिशा, प्रेरणा और अवसर मिले तो सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्ट परिणाम देने में किसी से पीछे नहीं हैं।









