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जल-जैविक आधारित है मिथिला की संस्कृति: प्रो. विद्यानाथ झा

मिथिला की संस्कृति जल-जैविक आधारित है। उचित जल प्रबंधन के बिना यहां विकासोन्मुख होना संभव नहीं है।

दरभंगा | मिथिला की संस्कृति जल-जैविक आधारित है। उचित जल प्रबंधन के बिना यहां विकासोन्मुख होना संभव नहीं है। कश्मीर से मणिपुर तक के लोगों के बीच मखान एक खाद्य के रूप में मौजूद है, जिसमें मिथिला परिक्षेत्र सहित कुछ भाग बंगाल को छोड़कर कहीं भी इसकी खेती नहीं की जाती। ये बातें प्रो. विद्यानाथ झा ने महारानी अधिरानीरमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय, दरभंगा के सभागार में पोथीघर फाउण्डेशन और महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘मिथिला में जल-जैविक सम्पादक समुचित उपयोग’ विषयक चतुर्थ व्याख्यान में कही।

खाद्य पदार्थ के साथ-साथ औषधि भी है मखान
मखान खाद्य पदार्थ के साथ-साथ औषधि भी है। यह फ़ैटलेस एवं एंटीऑक्सीडेंट होने के साथ ही पोषण से भरपूर एक सुपरफूड है। इसमें पाए जाने वाले प्रमुख पोषक तत्वों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, खनिज तत्व, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, सोडियम, लौह, जिंक, विटामिन बी1, बी2, बी3, ए, सी, अमीनो एसिड, लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स आदि हैं। इस प्रकार मखान एक संपूर्ण पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थ है, जो हड्डियों, हृदय, पाचन तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद है। इसके अलावे मिथिला के जलीय उत्पादों में सिंघारा, कमल, भैंठ, खोभी, करमी, सिक्की घास, कोइर्हला, जल कुंभी, ढैंचा, थेथर, खुरचन, डोका, घोंघा आदि के बारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

तालाबों को तेज गति से भरा जा रहा : डाॅ. दिनेश झा
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. दिनेश झा ने कहा कि पूर्व काल में बाढ़ का आना स्वाभाविक था, जो आज की अपेक्षा अधिक था। किंतु, बाढ़ का पानी ढाई दिनों से अधिक नहीं रुकता था। आज की स्थिति यह है कि बारिश के पानी से भी बाढ़ सी स्थिति हो जाती है। कारण स्पष्ट है तेज गति से तालाब भरे जा रहे हैं। मिथिला में जल से संबंधित उद्योगों का भी प्रबंधन बेहतरीन था। तालाब से मछली, मखान, खुरचन आदि के साथ इसके किनारे पान की खेती भी होती थी। तत्कालीन मिथिला के लोग हर तरह से संपन्न थे, लेकिन आज हाल-बेहाल हैं। मिथिला में जहां तालाब का निर्माण किया जाना समाजोपयोगी उत्कृष्ट कार्य माना जाता था, वह आज कहीं नहीं दिखता।

लाउ व्यवहार में, पोथी उपहार में
पोथीघर फाउण्डेशन का नारा “लाउ व्यवहार में, पोथी उपहार में” के तहत पोथीघर फाउण्डेशन की अध्यक्ष श्रीमती गुड़िया झा ने वक्ता और डॉ. राम सेवक झा के द्वारा अध्यक्ष को पोथी उपहार स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन आशुतोष मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन पोथीघर फाउण्डेशन के सचिव आनंद मोहन झा ने किया। मौके पर डॉ. अवनींद्र कुमार झा, वैद्य गणपति नाथ झा, हिरेंद्र झा, नारायण जी चौधरी, कृष्ण कुमार, मोदनाथ मिश्र, शाश्वत मिश्र, मुरारी कुमार झा सहित कई प्रोफ़ेसर, शोधार्थी मौजूद थे।

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शेखर

पत्रकारिता ही की है अब तक।
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