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अब पेट्रोल पंपों पर केरोसिन भी मिलेगा

  • नियमों में ढील इसलिए कि वैकल्पिक ईंधन की आपूर्ति तेज हो

नई दिल्ली/एजेंसी | ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण उपजे संकट से घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो पाई है। सरकार होर्ममुज जलडमरूमध्य से गैस लदे जहाज तो मंगवा रही है, लेकिन आपूर्ति इतनी नहीं है कि मांग पूरी हो सके। लोगों के घरों में खाना पक सके इसके लिए सरकार वैकल्पिक ईंधन पर जोर देना शुरू किया है। इसी कड़ी में सरकार ने निर्णय लिया है कि अगले 60 दिनों तक पेट्राेल पंप से केरोसिन भी मिलेंगे। हालांकि केरोसिन पहले की तरह राशन की दुकानों से भी मिलते रहेंगे। सरकार के फैसले के अनुसार, हर जिले में दो ऐसे पेट्रोल पंप चयनित किए जाएंगे जहां से केरोसिन का वितरण होगा। इन पेट्रोल पंपों पर अधिकतम पांच हजार लीटर तक केरोसिन रखने की अनुमति दी गई है।

48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन भी आवंटित
सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। यह नियमित कोटे से अलग है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि वे जिलों में वितरण के लिए स्थानों की पहचान करें और इसे मुख्य रूप से राशन दुकानों या चिह्नित पेट्रोल पंप पर बांटे। जानकारी के अनुसार, अभी तक सिर्फ 17 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने इसके लिए रुचि दिखाई है। जबकि हिमाचल प्रदेश और लद्दाख की सरकार ने कहा कि उनके यहां केरोसिन की आवश्यकता नहीं है।
मुद़्दा यह कि बहुत कम घरों में स्टोव
आंकड़े बताते हैं कि केंद्रीय स्तर पर एलपीजी को बढ़ावा देने के बाद बहुत कम ही घर हैं जहां स्टोव पर खाना बन रहा हो। मुद्दा यह भी है कि उत्तरप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान जैसे कई प्रदेशों में 2017 से ही जनवितरण प्रणाली की दुकान के जरिए केरोसिन का वितरण बंद कर दिया गया था। बिहार में भी स्थिति लगभग ऐसी ही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 21 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अब केरोसिन मुक्त हो चुके हैं। 2023 में पीडीएस के जरिए सिर्फ 10,60,524 किलोलीटर का केरोसिन आवंटन था। सबसे ज्यादा 66 प्रतिशत अकेले बंगाल को (7,04,016 किलोलीटर) मिला था। जबकि दस साल पहले यह आंकड़ा 86 लाख किलोलीटर के करीब था।
बिहार की स्थिति जानिए
बिहार में वर्तमान में लगभग 2.09 करोड़ परिवारों के पास राशन कार्ड हैं जबकि राज्य में लगभग 50,198 जन वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानें हैं। अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत लगभग 1.56 करोड़ कार्डधारी हैं। वहीं प्राथमिकता प्राप्त गृहस्थी (PHH) वाले करीब 22.93 लाख कार्डधारी हैं। केरोसिन देने में अंत्योदय कार्डधारकों को ही प्राथमिकता दी जाती है। चूंकि ये सबसे निर्धन परिवार माने जाते हैं, इसलिए सरकार इन्हें खाना पकाने और प्रकाश (रोशनी) के लिए तेल उपलब्ध कराती है। शहरी और गैस कनेक्शन वाले ग्रामीण क्षेत्रों में PHH कार्डधारकों को केरोसिन नहीं मिल रहा।

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विनोद कर्ण

पत्रकारिता में 37 वर्षों का अनुभव। 1988 में पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स से जुड़े। 1995 से 2000 तक मधुबनी से हिन्दी दैनिक आज के जिला संवाददाता रहे। अप्रैल 2000 से अगस्त 2002 तक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में अबोहर के ब्यूरो चीफ रहे। गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इस पेशे से 4 साल दूर रहे। 2006 में दैनिक जागरण, बेतिया से नई पारी शुरू की। तीन माह बाद सिल्लीगुड़ी स्थानांतरित। फिर पटना तबादला। 2008 से 2014 तक दैनिक जागरण, बेगूसराय और खगड़िया में ब्यूरो चीफ रहे। 2014 से 2017 तक दैनिक जागरण भागलपुर में डेस्क पर सीनियर सब एडिटर रहे। उसके बाद से न्यूज पोर्टल लाइव सिटीज, बिफोर प्रिंट और टॉप हिन्दी न्यूज से जुड़े रहे। वर्तमान में समकालीन तापमान के साथ-साथ newsvistabih.com न्यूज पोर्टल में स्वतंत्र रूप से लेखन जारी।
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